ताज़ा खबर
OtherPoliticsTop 10ताज़ा खबरबिज़नेसभारतराज्य

विकास से ज्यादा वेतन और सब्सिडी पर खर्च, राज्यों के बजट का खुला हिसाब

Share

  • 51 लाख करोड़ का खर्च, लेकिन विकास निवेश अब भी सीमित

  • बढ़ती सब्सिडी, घटती गुंजाइश: राज्यों के बजट की कैग रिपोर्ट

✍️ डिजिटल न्यूज डेस्क, नई दिल्ली/मुंबई | देश के राज्यों का कुल खर्च पिछले एक दशक में 131 प्रतिशत बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 में 51.20 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया है, लेकिन इस बढ़ोतरी का बड़ा हिस्सा विकास परियोजनाओं के बजाय वेतन, पेंशन, सब्सिडी और अन्य प्रशासनिक मदों में खर्च हुआ।

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की मंगलवार को जारी ‘राज्य वित्त 2024-25’ रिपोर्ट के अनुसार राज्यों के हर 100 रुपये के खर्च में औसतन 83 रुपये राजस्व व्यय पर खर्च हुए, जबकि बुनियादी ढांचा निर्माण से जुड़े पूंजीगत निवेश की हिस्सेदारी अपेक्षाकृत सीमित रही।

रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2015-16 में राज्यों का कुल व्यय 22.18 लाख करोड़ रुपये था, जो 2024-25 में बढ़कर 51.20 लाख करोड़ रुपये हो गया। इस दौरान राज्यों ने सामाजिक क्षेत्र और कल्याणकारी योजनाओं पर खर्च बढ़ाया, लेकिन राजस्व व्यय का दबदबा लगातार कायम रहा।

कैग ने रेखांकित किया है कि वेतन, पेंशन, ब्याज भुगतान और सब्सिडी जैसे प्रतिबद्ध खर्च राज्यों के बजट पर लगातार भारी पड़ रहे हैं। वित्त वर्ष 2024-25 में ये मदें राजस्व व्यय का 53.31 प्रतिशत हिस्सा निगल गईं। इनमें भी सब्सिडी व्यय में उल्लेखनीय तेजी दर्ज की गई है, जिसने राज्यों की वित्तीय गुंजाइश को और सीमित किया है।

रिपोर्ट बताती है कि कुल व्यय में सामाजिक क्षेत्र की हिस्सेदारी सबसे अधिक 39 प्रतिशत रही, जबकि सामान्य प्रशासनिक क्षेत्र का हिस्सा 29.79 प्रतिशत और आर्थिक क्षेत्र का 28.68 प्रतिशत रहा। हालांकि आर्थिक क्षेत्र में पूंजीगत निवेश का 62.71 प्रतिशत हिस्सा गया, लेकिन कुल बजट में इसकी हिस्सेदारी अब भी राजस्व व्यय की तुलना में काफी कम है।

राज्यों की आय के मोर्चे पर अपनी कर आय (एसओटीआर) सबसे बड़ा आधार बनी रही। कुल राजस्व प्राप्तियों में इसकी हिस्सेदारी बढ़कर 50.13 प्रतिशत तक पहुंच गई, हालांकि अंतिम वर्ष में इसके वृद्धि दर में सुस्ती के संकेत भी मिले हैं।

कैग की रिपोर्ट ऐसे समय आई है जब कई राज्य कल्याणकारी योजनाओं, चुनावी वादों और बढ़ते राजकोषीय दबावों के बीच संतुलन साधने की चुनौती का सामना कर रहे हैं। रिपोर्ट से संकेत मिलता है कि राज्यों के बजट का बड़ा हिस्सा अब भी अनिवार्य और राजस्व मदों में खप रहा है, जबकि दीर्घकालिक विकास के लिए जरूरी पूंजीगत व्यय की हिस्सेदारी सीमित बनी हुई है।

कैग रिपोर्ट के मुख्य तथ्य

  • 10 साल में राज्यों का कुल खर्च 22.18 लाख करोड़ से बढ़कर 51.20 लाख करोड़ रुपये।
  • कुल खर्च का औसतन 83% हिस्सा राजस्व व्यय पर।
  • वेतन, पेंशन, ब्याज और सब्सिडी ने राजस्व व्यय का 53.31% हिस्सा लिया।
  • सामाजिक क्षेत्र को 39% और आर्थिक क्षेत्र को 28.68% आवंटन।
        
  • राज्यों की अपनी कर आय बढ़कर कुल राजस्व का 50.13% हुई।

Share

Related posts

जमानत का इंतजार करते ही रहे स्टैन स्वामी

samacharprahari

इटावा में एक साथ चार शावकों की मौत से मचा हड़कंप, सफारी प्रबंधन जांच में जुटा

Prem Chand

देश में ताकतवर और कमजोर के लिए अलग-अलग कानून व्यवस्थाएं नहीं हो सकतीं

Amit Kumar

महाराष्ट्र में अनलॉक 4 की गाइडलाइंस जारी, स्कूल कॉलेज रहेंगे बंद

samacharprahari

सुरक्षा परिषद का अध्‍यक्ष बना भारत

samacharprahari

जजों की नियुक्ति में पसंद-नापसंद की नीति ठीक नहीं: सुप्रीम कोर्ट

samacharprahari