ताज़ा खबर
OtherPoliticsTop 10एजुकेशनताज़ा खबरभारतराज्य

 ‘डी-रिजर्वेशन’ के नए नियम पर भड़का छात्रों का गुस्सा, आरक्षण हड़पने का लगा गंभीर आरोप

Share

DDU गोरखपुर विश्वविद्यालय का विवादित पत्र वायरल

✍️ प्रहरी संवाददाता मुंबई/लखनऊ |  दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय (DDUGU) प्रशासन द्वारा पीएचडी (PhD) प्रवेश सत्र 2025-26 को लेकर जारी एक आधिकारिक पत्र ने सोशल मीडिया से लेकर शैक्षणिक गलियारों तक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है।

विश्वविद्यालय के शोध एवं विकास प्रकोष्ठ द्वारा दिनांक 10/06/2026 को जारी पत्रांक 5553 के तहत जो दिशा-निर्देश दिए गए हैं, उन्हें लेकर आरक्षित वर्ग के छात्रों और शिक्षक संगठनों में भारी आक्रोश है। इस अधिसूचना को सीधे तौर पर अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की आरक्षित सीटों को ‘हड़पने’ और उन्हें सामान्य श्रेणी में बदलने (De-reservation) की एक सोची-समझी साजिश बताया जा रहा है। हालांकि इस वायरल पत्र की पुष्टि नहीं हो सकी है।

वायरल दस्तावेज़ के मुताबिक, विश्वविद्यालय के शोध एवं विकास प्रकोष्ठ के निदेशक और उप कुलसचिव के हस्ताक्षरों वाले इस आदेश में स्पष्ट तौर पर सीटों के परिवर्तन (कन्वर्ट) का एक नया क्रम निर्धारित किया गया है। पत्र के बिंदु संख्या 2 में कहा गया है कि यदि अनुसूचित जनजाति (ST) कैटेगरी में कोई सीट प्रवेश हेतु रिक्त रहती है, तो उन सीटों को अनुसूचित जाति (SC) कैटेगरी में परिवर्तित कर दिया जाए।

इसके बाद बिंदु संख्या 3 में सबसे विवादित नियम मढ़ा गया है, जिसके अनुसार यदि संबंधित कैटेगरी में कोई आवेदनकर्ता प्रवेश हेतु इच्छुक नहीं है या आवेदन शेष नहीं है, तो ऐसी दशा में उन सभी रिक्त सीटों को तत्काल सामान्य श्रेणी (UR – Unreserved) में परिवर्तित कर प्रवेश प्रक्रिया पूर्ण कर ली जाए। पत्र में इस पूरी कवायद को 30/06/2026 तक पूरा करने का अल्टीमेटम दिया गया है।

इस आदेश के सामने आते ही विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया गया है। छात्र नेताओं और विशेषज्ञों का तर्क है कि आज देश और प्रदेश में हर श्रेणी में अभूतपूर्व बेरोजगारी है, जिसके कारण उच्च शिक्षा में योग्य अभ्यर्थियों की कोई कमी नहीं है। यहां तक कि अब एससी (SC) वर्ग के उम्मीदवार भी अपनी योग्यता के दम पर अनारक्षित (General) श्रेणी के कट-ऑफ के करीब रैंक हासिल कर रहे हैं। ऐसे में विश्वविद्यालय का यह तर्क कि ‘योग्य उम्मीदवार नहीं मिल रहे’, पूरी तरह गले से नीचे नहीं उतरता। आरोप लगाया जा रहा है कि इस नई गाइडलाइन का अंतिम लक्ष्य केवल आरक्षित सीटों को सामान्य वर्ग की झोली में डालना है।

सबसे बड़ा सवाल प्रक्रियात्मक पारदर्शिता पर उठाया गया है। प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय ने इस आदेश में यह कहीं नहीं लिखा कि सीटों को सामान्य श्रेणी में बदलने से पहले कम से कम तीन बार विशेष विज्ञापन (Special Advertisement) निकाला जाए ताकि आरक्षित वर्ग के छात्रों तक सूचना पहुंच सके।

इसके अलावा, न्यूनतम योग्यता रखने वाले छात्रों को ‘नॉट फाउंड सूटेबल’ (NFS) करके जानबूझकर बाहर करने के खेल पर भी कोई रोक नहीं लगाई गई है। छात्रों का स्पष्ट आरोप है कि बिना पर्याप्त प्रयास किए आनन-फानन में 30 जून तक सीटों को अनारक्षित वर्ग में बदलने की यह जल्दबाजी केवल ‘आरक्षण की सरेआम लूट’ है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।


Share

Related posts

सतारा में कोयना डैम के पास मामूली तीव्रता का भूकंप

Vinay

फोन टैपिंग मामलाः तत्कालीन गृह मंत्री फडणवीस की भूमिका की हो जांच

samacharprahari

62 हजार करोड़ का ‘करंट’!

samacharprahari

Israel-Hamas War: इस्राइल पर ईरान-हिज्बुल्ला के हमले का खतरा, US की चेतावनी

samacharprahari

ईडी ने 106 करोड़ रुपये की प्रॉपर्टी कुर्क की

samacharprahari

शीतल लोढ़ा फाउंडेशन द्वारा शैक्षिक सामग्री का वितरण

Prem Chand