मनी लॉन्ड्रिंग मामले से संबंधित कानूनों के दुरुपयोग का आरोप
डिजिटल न्यूज डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि इंफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED), प्रीवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) का केस तब तक नहीं बना सकती है, जब तक कि साजिश मनी लॉन्ड्रिंग से संबंधित न हो। कोर्ट पीएमएलए के तहत ईडी को दी गई शक्तियों को बरकरार रखने से जुड़ी याचिका पर सुनवाई कर रहा था।
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सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल पीएमएलए कानून को वैध करार दिया था। इसके तहत ईडी को अधिकार है कि वह संपत्ति को अटैच कर आरोपी को गिरफ्तार कर सके।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ रिव्यू पिटिशन दाखिल की गई है। याचिकाकर्ता की तरफ से यह दलील दी कि ईडी ऐसे मामलों में भी पीएमएलए केस दर्ज कर रही है, जिसका संबंध इनकम टैक्स से संबंधित है। ईडी किब्याह कार्रवाई गलत है।
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‘स्वतंत्रता के अधिकार का हो रहा उल्लंघन’
याचिकाकर्ता के वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि जब भी किसी को ईडी बुलाती है, तो पता नहीं होता कि उसे बतौर आरोपी बुलाया गया है या बतौर गवाह। रिमांड के दौरान आरोपी को पता चलता है कि चार्ज क्या हैं। इससे उसके अग्रिम जमानत का चांस भी खत्म हो जाता है। ऐसे में अग्रिम जमानत का प्रावधान खत्म हो चुका है। यह जीवन जीने की स्वतंत्रता (अनुच्छेद-21) का उल्लंघन है।
