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HZL डील में सुप्रीम कोर्ट का संदेह?

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अपनी एजेंसी को ही झूठा बता रही है सरकार!
पूर्व पीएम वाजपेयी की साफ छवि पर दाग लगने का खतरा

नई दिल्ली। हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड (एचजेडएल-HZL) की बिक्री के मामले में केंद्र सरकार ने केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई को ही कठघरे में खड़ा कर दिया है। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि अटल बिहार वाजपेयी सरकार में सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड की बिक्री को लेकर सीबीआई ने शीर्ष अदालत को गलत जानकारी दी है।

सरकार की दलील
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने देश की शीर्ष अदालत में यह बात कही है। उन्होंने कहा, ‘सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में जो मौलिक तथ्य पेश किए थे, वो झूठे थे या संभवतः गलत… विनिवेश की निर्णय प्रक्रिया को लेकर सर्वोच्च न्यायालय में सीबीआई की कही गई एक-एक पंक्ति झूठी थी या गलत। यह त्रीस्तरीय सामूहिक फैसला था।’ मोदी सरकार के इस कदम से अब पूर्व पीएम वाजपेयी की साफ छवि पर दाग लगने का खतरा बढ़ गया है।

क्या है मामला
सरकार ने साल 2002 में एचजेडएल में 26 फीसदी हिस्सेदारी 445 करोड़ रुपये में वेदांत ग्रुप की सहयोगी कंपनी स्टरलाइट को बेच दी थी। आरोप है कि इसकी असल कीमत 39,000 करोड़ रुपये थी। नवंबर 2013 में सीबीआई ने इस मामले में संदिग्ध वित्तीय अनियमितताओं के आधार पर प्रांरभिक जांच शुरू की। लेकिन इसे बाद में बंद कर दिया गया। अब सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सीबीआई जांच के आदेश दिए हैं।

सुप्रीम कोर्ट का रुख
जस्टिस चंद्रचूड़ और जस्टिस सूर्यकांत की पीठ ने कहा कि अदालत ने दस्तावेजों और सीबीआई की जांच रिपोर्टों के साथ-साथ उसकी क्लोजर रिपोर्ट का भी गहन अध्ययन किया है। और इस निष्कर्ष पर पहुंची है कि मामले की शुरू से जांच की जरूरत है। कोर्ट ने कहा कि डील की एक दो नहीं, बल्कि 18 बिदुओं को लेकर संदेह है, जिनकी जांच होनी ही चाहिए।

उठ रहे हैं बिक्रियों पर सवाल
बता दें कि वाजपेयी सरकार में सरकारी उपक्रमों को निजी हाथों में सौंपने के लिए अलग से विनिवेश मंत्रालय बनाया गया था। 10 दिसंबर 1999 को अलग विनिवेश विभाग का गठन किया गया था, जबकि 6 सितंबर 2001 को विनिवेश मंत्रालय बनाया गया था। अरुण शौरी विनिवेश मंत्री थे, जिनकी देखरेख में सार्वजनिक क्षेत्र की कई कंपनियों की धड़ाधड़ बिक्री हुई। अब कुछ बिक्रियों पर सवाल उठ रहे हैं और कहा जा रहा है कि तत्कालीन सरकार ने इन कंपनियों को औने-पौने दामों में निजी कंपनियों को बेच दीं।

वाजपेयी सरकार में धड़ाधड़ बिकी थीं सरकारी कंपनियां
एचजेडएल, भारत ऐल्युमीनियम (बाल्को), लक्ष्मी विलास होटल और स्टरलाइट अपॉर्च्युनिटीज एंड वेंचर्स लिमिटेड (एसओवीएल) समेत कई विवादित डील को लेकर वाजपेयी सरकार कटघरे में रही है। हिंदुस्तान डील में गड़बड़ी का मामला अभी भी सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।

वाजपेयी सरकार के कार्यकाल में विनिवेश की प्रक्रिया धड़ल्ले से चलती गई और मारुति उद्योग लि., विदेश संचार निगम लि. (वीएसएनएल), सरकारी एफएमसीजी कंपनी मॉडर्न फूड इंडस्ट्रीज, इंडियन पेट्रोकेमिकल्स कॉर्प (आईपीसीएल), प्रदीप फॉस्फेट्स, जेसॉप एंड कंपनी समेत कई सरकारी कंपनियां प्राइवेट सेक्टर को दे दी गईं।


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