✍🏻 डिजिटल न्यूज डेस्क, लखनऊ | स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) अपडेशन की भागदौड़ के बीच यूपी सरकार ने आम लोगों को एक और ‘सरप्राइज’ दे दिया है।
अब आधार कार्ड जन्मतिथि का प्रमाण नहीं माना जाएगा। यानी जिस आधार को कभी “सबका आधार” बताया गया है, वह जन्मतिथि साबित करने में आधारहीन निकला। हैरानी की बात यह है कि लोग महीनों से SIR अपडेशन में उलझे हैं। फोटो ठीक कराओ, DOB ठीक कराओ, पता अपडेट कराओ और इसी बीच सरकार ने साफ कर दिया कि चाहे आधार में कितनी भी मेहनत से जन्मतिथि अपडेट करा लें, उसे उम्र साबित करने में माना ही नहीं जाएगा।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने आधार कार्ड को लेकर बड़ा प्रशासनिक बदलाव कर दिया है। राज्य सरकार ने स्पष्ट आदेश जारी करते हुए कहा है कि अब आधार कार्ड को जन्मतिथि (Date of Birth) या Birth Certificate के आधिकारिक प्रमाण के रूप में स्वीकार नहीं किया जाएगा। यह निर्णय सीधे आम नागरिकों को प्रभावित करेगा और कई सरकारी प्रक्रियाओं में परिवर्तन लाएगा।
योजना विभाग के विशेष सचिव अमित सिंह बंसल ने सभी विभागों को नया निर्देश भेजा है। आदेश में कहा गया है कि आधार कार्ड में दर्ज जन्मतिथि किसी अधिकृत जन्म प्रमाणपत्र (Birth Certificate) से लिंक नहीं होती, इसलिए इसे जन्मतिथि का वैध प्रमाण नहीं माना जा सकता। UIDAI लखनऊ क्षेत्रीय कार्यालय ने अपने पत्र के माध्यम से पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि आधार केवल पहचान का दस्तावेज है, न कि उम्र या जन्मतिथि प्रमाण का मान्य दस्तावेज।
सरकार ने पाया कि कई विभाग अब भी Aadhaar को Date of Birth Proof के रूप में स्वीकार कर रहे थे। इसके बाद यह आदेश जारी करते हुए सभी विभागों से कहा गया है कि वे तुरंत आधार को जन्मतिथि प्रमाण के रूप में स्वीकार करना बंद करें और अपने अधीनस्थ कार्यालयों को भी इस बारे में सूचित करें।
सरकार का यह फैसला जन्मतिथि से जुड़े दस्तावेजों की विश्वसनीयता और सत्यापन प्रक्रिया को मजबूत करने के उद्देश्य से लिया गया है। नया नियम विभिन्न सरकारी सेवाओं, योजनाओं, स्कूल एडमिशन और प्रमाणपत्र बनवाने की प्रक्रिया पर प्रभाव डालेगा।
लोगों में अब यह सवाल उठ रहा है कि जब आधार बैंक, राशन, गैस, स्कूल एडमिशन, सिम कार्ड तक हर जगह लिंक कराना जरूरी है, तो जन्मतिथि के मामले में ही उसकी ‘SIR वाली इज्जत’ क्यों नहीं चली!
