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डिजिटल सुधार या खेती पर असर? महाराष्ट्र में जमीन के NA रूपांतरण की नई व्यवस्था लागू

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✍️ प्रहरी संवाददाता, मुंबई | महाराष्ट्र सरकार ने जमीन के गैर-कृषि (NA) उपयोग की प्रक्रिया को सरल और डिजिटल बनाने के उद्देश्य से बड़ा कदम उठाते हुए इमारत परमिशन मैनेजमेंट सिस्टम (BPMS) को लागू कर दिया है। इस नई व्यवस्था का शुभारंभ राज्य के राजस्व मंत्री ने मंत्रालय में किया।

नई प्रणाली के तहत अब नागरिक जमीन के गैर-कृषि रूपांतरण (NA) के लिए आवश्यक अधिमूल्य (प्रीमियम) का भुगतान पूरी तरह ऑनलाइन कर सकेंगे। भुगतान के तुरंत बाद उसकी एंट्री सीधे 7/12 (सातबारा) भूमि अभिलेख में स्वतः दर्ज हो जाएगी।

सरकार के अनुसार, यह कदम महाराष्ट्र भूमि राजस्व संहिता में किए गए संशोधनों के अनुरूप उठाया गया है, जिससे जमीन के उपयोग परिवर्तन की प्रक्रिया को पारदर्शी, तेज और आसान बनाया जा सके। BPMS पोर्टल के जरिए अब भवन निर्माण अनुमति, विकास योजनाओं की स्वीकृति और रूपांतरण शुल्क का भुगतान एक ही प्लेटफॉर्म पर संभव हो गया है।

राजस्व विभाग का दावा है कि इस डिजिटल व्यवस्था से नागरिकों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और मानवीय हस्तक्षेप कम होने से भ्रष्टाचार पर भी अंकुश लगेगा। साथ ही, इज़ ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा मिलेगा और बड़े विकास परियोजनाओं की मंजूरी प्रक्रिया भी तेज होगी। मंत्री बावनकुळे ने बताया कि इसी तर्ज पर ऑटो DCR सिस्टम में भी सुधार का काम तेजी से चल रहा है, जिसे अगले 10 दिनों में पूरा करने का लक्ष्य है।

बता दें कि राज्य में घरों और व्यावसायिक परियोजनाओं के निर्माण के लिए पहले गैर-कृषि अनुमति प्राप्त करने में महीनों का समय लगता था। नई डिजिटल प्रणाली लागू होने से यह प्रक्रिया तेज होगी, लेकिन इसके साथ ही जमीन के उपयोग में तेजी से बदलाव की संभावना भी बढ़ी है।

हालांकि, इस व्यवस्था के लागू होने के साथ ही राज्य में कृषि भूमि के उपयोग को लेकर नई चिंताएं भी सामने आने लगी हैं। गैर-कृषि रूपांतरण प्रक्रिया के सरल होने से खेती की जमीन का तेजी से आवासीय और औद्योगिक उपयोग में बदलने की संभावना बढ़ गई है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि उपयोग का स्वरूप बदलने के संकेत मिल रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि बीते वर्षों में पहले ही प्रति व्यक्ति कृषि भूमि घटती रही है। ऐसे में NA रूपांतरण को आसान बनाना कृषि क्षेत्र पर दीर्घकालिक प्रभाव डाल सकता है। कई मामलों में किसान अपनी जमीन बेचकर अस्थायी आर्थिक लाभ तो प्राप्त कर लेते हैं, लेकिन बाद में उन्हें स्थायी आय के स्रोत से वंचित होना पड़ता है।

ग्रामीण क्षेत्रों से शहरी क्षेत्रों की ओर बढ़ते इस रुझान के बीच यह भी देखा जा रहा है कि जमीन से जुड़े परिवार धीरे-धीरे औद्योगिक और निर्माण क्षेत्र में श्रमिक के रूप में शामिल हो रहे हैं। इससे भूमि स्वामित्व आधारित आजीविका से श्रम आधारित आजीविका की ओर बदलाव के संकेत मिल रहे हैं।

 


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