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मलेशिया में भारतीय पर्यटक के साथ कथित दुर्व्यवहार: ‘ट्रूली एशिया’ के दावों पर सवाल

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  • मलेशिया एयरपोर्ट पर भारतीय पर्यटक से नस्लीय दुर्व्यवहार

  • वैध वीजा के बावजूद 22 घंटे किया प्रताड़ित

  • भारतीय पत्रकार के बेटे के साथ अमानवीय व्यवहार

  • भारत सरकार से हस्तक्षेप की मांग

✍️ प्रहरी संवाददाता मुंबई/कुआलालंपुर |  ‘मलेशिया, ट्रूली एशिया’ के आकर्षक नारे के बीच मलेशिया से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने भारतीय पर्यटकों की सुरक्षा और सम्मान को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कुआलालंपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर एक वरिष्ठ भारतीय पत्रकार के बेटे के साथ कथित तौर पर न केवल अमानवीय व्यवहार किया गया, बल्कि नस्लीय टिप्पणियों के आरोप भी लगे हैं।

सूत्रों के अनुसार, मुंबई के वरिष्ठ पत्रकार के 24 वर्षीय पुत्र 6 अप्रैल को दोपहर 3:48 बजे कुआलालंपुर पहुंचे थे। उनके पास वैध भारतीय पासपोर्ट, मलेशियाई टूरिस्ट वीजा, रिटर्न टिकट, पर्याप्त विदेशी मुद्रा और बैंकिंग दस्तावेज मौजूद थे। इसके बावजूद इमिग्रेशन गेट नंबर 8 पर तैनात अधिकारियों ने उन्हें रोक लिया और बिना किसी स्पष्ट कारण के प्रवेश से इनकार कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों का दावा है कि अधिकारियों का रवैया न केवल सख्त, बल्कि अपमानजनक और आक्रामक था, खासकर भारतीय यात्रियों के प्रति बेहद ही घटिया मानसिकता से भरा था।

मामला यहीं नहीं रुका। भारतीय पर्यटक को लगभग 22 घंटे तक एक केबिन में बैठाकर रखा गया, जहां उन्हें बुनियादी सुविधाएं देने में भी लापरवाही बरती गई। आरोप है कि इस दौरान अधिकारियों द्वारा भारतीयों को लेकर अपशब्दों का इस्तेमाल किया गया, जो सीधे तौर पर नस्लीय भेदभाव की श्रेणी में आता है। मोबाइल चार्जिंग के लिए 50 रिंगित (मलेशिया करंसी) की डिमांड की गई। आखिरकार उन्हें बिना किसी लिखित कारण या स्पष्टीकरण के उन्हें वापस भारत भेज दिया गया।

इस घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल मलेशियाई प्रशासन की चुप्पी को लेकर उठ रहा है। शिकायत ईमेल के माध्यम से भेजे जाने के बावजूद मलेशियाई आव्रजन विभाग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। यह न केवल प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाता है, बल्कि दोनों देशों के बीच पर्यटन संबंधों पर भी असर डाल सकता है।

पीड़ित के पिता ने भारतीय उच्चायोग और विदेश मंत्रालय से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि यदि वैध दस्तावेज रखने के बावजूद भारतीय नागरिकों को इस तरह अपमानित किया जाता है, तो मलेशिया जैसे लोकप्रिय पर्यटन स्थल की विश्वसनीयता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

उन्होंने मांग की है कि एयरपोर्ट के सीसीटीवी फुटेज की जांच कर संबंधित अधिकारियों की पहचान की जाए, भारत सरकार इस मुद्दे पर कड़ा राजनयिक विरोध दर्ज कराए और पीड़ित को हुए मानसिक व आर्थिक नुकसान के लिए उचित मुआवजा और आधिकारिक माफी सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने बताया कि यह मामला केवल एक व्यक्ति के साथ हुए व्यवहार का नहीं, बल्कि उन हजारों भारतीय पर्यटकों की सुरक्षा और सम्मान का प्रश्न बन गया है, जो हर साल मलेशिया की यात्रा करते हैं।
इतना ही ही नहीं , पीआईबी के कुछ अधिकारी भी मानते हैं कि मौजूदा सरकार के कार्यकाल में इस तरह की घटनाएं बढ़ी हैं। अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि भारत सरकार इस मुद्दे को कितनी गंभीरता से उठाती है और क्या इस घटना के बाद कोई ठोस कार्रवाई होती है।


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