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रुपये पर दबाव चरम पर, ‘मजबूत अर्थव्यवस्था’ के दावों के बीच 9.5% टूटी भारतीय मुद्रा

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  • विदेशी पूंजी निकासी, महंगे तेल और वैश्विक अनिश्चितता के बीच RBI को चलाना पड़ा 15 साल का सबसे बड़ा मुद्रा बचाव अभियान

✍️ प्रहरी संवाददाता, मुंबई | भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर सरकार भले ही लगातार “मजबूत बुनियाद” और “दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था” होने के दावे करती रही हो, लेकिन वित्त वर्ष 2026 में भारतीय रुपया अभूतपूर्व दबाव में दिखाई दिया। हालात इतने बिगड़ गए कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) को रुपये को संभालने के लिए रिकॉर्ड 53.13 अरब डॉलर बेचने पड़े। इसके बावजूद रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले करीब 9.5% तक टूट गया, जो हाल के वर्षों की सबसे बड़ी गिरावटों में शामिल है।

विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली, महंगे कच्चे तेल और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता ने पूरे साल भारतीय मुद्रा बाजार को झकझोर कर रखा। केंद्रीय बैंक को स्पॉट मार्केट में सीधे डॉलर बेचकर बाजार में हस्तक्षेप करना पड़ा। यह पिछले 15 वर्षों का सबसे बड़ा मुद्रा बचाव अभियान माना जा रहा है। इससे पहले 2012 के ‘टेपर टेंट्रम’ और 2023 के रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान भी RBI ने बड़ा दखल दिया था, लेकिन FY26 का हस्तक्षेप उन सभी रिकॉर्ड्स से आगे निकल गया।

रुपये पर सबसे ज्यादा दबाव अगस्त से अक्टूबर 2025 के बीच देखने को मिला, जब वैश्विक टैरिफ विवाद, डॉलर की मजबूती और भारत से तेजी से बाहर निकलती विदेशी पूंजी ने बाजार में घबराहट बढ़ा दी। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की भारी बिकवाली से डॉलर की मांग तेजी से बढ़ी और रुपया लगातार कमजोर होता गया।

स्थिति को संभालने के लिए RBI ने सिर्फ स्पॉट मार्केट ही नहीं, बल्कि फॉरवर्ड मार्केट में भी रिकॉर्ड स्तर पर दखल दिया। मार्च 2026 तक केंद्रीय बैंक की शुद्ध फॉरवर्ड डॉलर पोजिशन रिकॉर्ड नकारात्मक 103.06 अरब डॉलर तक पहुंच गई। इसका उद्देश्य बैंकिंग सिस्टम में नकदी संकट पैदा किए बिना रुपये पर दबाव कम करना था।

भारत की तेल आयात पर भारी निर्भरता ने संकट को और गहरा किया। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने डॉलर की मांग बढ़ाई, जबकि मजबूत अमेरिकी डॉलर ने उभरते बाजारों की मुद्राओं पर अतिरिक्त दबाव डाला। विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि RBI आक्रामक हस्तक्षेप नहीं करता, तो रुपये में गिरावट और तेज हो सकती थी, जिससे आयातित महंगाई और चालू खाता घाटा दोनों बढ़ने का खतरा था।


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