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संसद में ऐतिहासिक ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पेश
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850 होगी लोकसभा सीटों की संख्या
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महिलाओं को 33% आरक्षण
✍️ प्रहरी संवाददाता मुंबई / नई दिल्ली | भारतीय संसदीय इतिहास के सबसे बड़े ‘डेमोक्रेटिक ओवरहॉल’ की तैयारी पूरी हो चुकी है। केंद्र सरकार गुरुवार को संसद में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023’ पेश करने जा रही है, जो न केवल महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देगा, बल्कि देश के विधायी मानचित्र को भी हमेशा के लिए बदल देगा।
इस विधेयक का सबसे चौंकाने वाला और दूरगामी प्रावधान लोकसभा की सदस्य संख्या में भारी बढ़ोतरी है। नए प्रस्ताव के अनुसार, निचले सदन की सीटों को मौजूदा 543 से बढ़ाकर 850 किया जाएगा, जिससे यह दुनिया की सबसे विशाल लोकतांत्रिक सभाओं में से एक बन जाएगी।
अनुच्छेद 81 में संशोधन: 850 सांसदों का नया सदन
संविधान के अनुच्छेद 81 में बड़े संशोधन का प्रस्ताव है, जिसके तहत राज्यों के क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्रों से 815 और केंद्र शासित प्रदेशों से 35 सदस्य चुनकर आएंगे। राजनीतिक गलियारों में इसे ‘डीलिमिटेशन कार्ड’ के रूप में देखा जा रहा है।
विधेयक स्पष्ट करता है कि सीटों का यह नया बंटवारा और महिला आरक्षण का लाभ आगामी परिसीमन प्रक्रिया के पूरा होने के बाद ही जमीन पर उतरेगा। चौंकाने वाली बात यह है कि इस पूरी कवायद के लिए फिलहाल 2011 की जनगणना के आंकड़ों को ही आधार बनाया जाएगा, क्योंकि 2021 की जनगणना अब तक लंबित है।
दिल्ली से जम्मू-कश्मीर तक विशेष विधायी तैयारी
सरकार की रणनीति केवल एक विधेयक तक सीमित नहीं है। महिला आरक्षण को फूलप्रूफ बनाने के लिए मुख्य संविधान संशोधन के साथ-साथ तीन अन्य महत्वपूर्ण पूरक विधेयक भी पेश किए जाएंगे। इनमें दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और पुडुचेरी के लिए विशिष्ट विधायी प्रावधान शामिल हैं, ताकि केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में भी एक-तिहाई भागीदारी सुनिश्चित की जा सके।
मसौदे में यह भी साफ है कि महिलाओं के लिए आरक्षित होने वाली कुल सीटों में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) की महिलाओं के लिए कोटा अनिवार्य रूप से शामिल होगा।
जनगणना और परिसीमन: बड़ी चुनौती और पेच
राजनीतिक संपादक के नजरिए से देखें तो इस विधेयक की टाइमिंग और कार्यान्वयन की शर्तें बेहद महत्वपूर्ण हैं। ‘जनसंख्या’ की व्याख्या ‘नवीनतम प्रकाशित जनगणना’ के रूप में करके सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि 2011 के डेटा का उपयोग होगा, लेकिन साथ ही संसद को यह शक्ति भी दी गई है कि वह भविष्य में जनगणना के आधार का चयन कर सके।
हालांकि, 2021 की जनगणना में देरी और दक्षिण बनाम उत्तर भारत के बीच सीटों के असंतुलन की चिंताओं के बीच, 850 सीटों का यह नया समीकरण आने वाले दिनों में संसद में तीखी बहस का केंद्र बनना तय है।
