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ईरान पर ‘फाइनल स्ट्राइक’ की तैयारी? पेंटागन ने वेस्ट एशिया में भेजे 10,000  सैनिक; ट्रंप बोले- 2 दिन में होगा युद्ध का अंत!

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  • होर्मुज जलडमरूमध्य को ‘स्थायी’ खोलने का ट्रंप का बड़ा ऐलान

  • चर्चा है कि चीन ने भी खींचे हाथ

  • अमेरिका का दावा – ईरान की 90% अर्थव्यवस्था समुद्री नाकेबंदी से पंगु

✍️ प्रहरी संवाददाता मुंबई / नई दिल्ली / तेहरान |  पश्चिमी एशिया में 28 फरवरी से भड़की बारूद की लपटें अब एक ऐतिहासिक और निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई हैं। एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ‘अगले दो दिनों’ में युद्ध के अंत की भविष्यवाणी कर कूटनीतिक हलचल तेज कर दी है, वहीं दूसरी ओर पेंटागन ने 10,000 से अधिक अतिरिक्त सैनिकों को युद्ध क्षेत्र के लिए रवाना कर सैन्य दबाव को चरम पर पंहुचा दिया है।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच बुधवार को पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ तेहरान पंहुचना सबसे बड़ी कूटनीतिक हलचल बनकर उभरा है। मुनीर के साथ गृह मंत्री मोहसिन नकवी भी मौजूद हैं, जो ट्रम्प प्रशासन का सीधा संदेश लेकर ‘इस्लामाबाद वार्ता’ के दूसरे दौर की जमीन तैयार कर रहे हैं।

ट्रम्प का ‘ग्रैंड बार्गेन’ और होर्मुज पर दावा

राष्ट्रपति ट्रम्प ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को स्थायी रूप से खोलने का ऐलान करते हुए एक बड़ा कूटनीतिक दांव चला है। ट्रम्प का दावा है कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से आश्वासन दिया है कि बीजिंग अब ईरान को हथियारों की आपूर्ति नहीं करेगा।

ट्रम्प इस पूरी कवायद को एक ‘ग्रैंड बार्गेन’ की तरह देख रहे हैं, जिसके तहत ईरान को परमाणु कार्यक्रम पर 20 साल के कड़े प्रतिबंधों के बदले वैश्विक अर्थव्यवस्था में फिर से शामिल किया जा सकता है। हालांकि, तेहरान फिलहाल केवल 3 से 5 साल के ‘न्यूक्लियर मौरटोरियम’ (परमाणु रोक) पर अड़ा है, जो वार्ता की राह में सबसे बड़ा रोड़ा बना हुआ है।

ईरान की 3 समुद्री रास्ते बंद करने की धमकी

उधर, ईरान ने दुनिया के 3 अहम समुद्री रास्ते बंद करने की धमकी दी है। उसने कहा है कि अगर अमेरिका ने होर्मुज और उसके बंदरगाहों पर नौसैनिक नाकेबंदी जारी रखी, तो वह रेड सी, ओमान सागर और पर्शियन गल्फ (फारस की खाड़ी) में समुद्री व्यापार पूरी तरह रोक देगा।

ईरानी सेना के केंद्रीय कमांड सेंटर चीफ अली अब्दोल्लाही ने कहा कि अमेरिकी पाबंदियां और ईरानी जहाजों व तेल टैंकरों की सुरक्षा को खतरे में डालने की कोशिशें उकसावे की कार्रवाई है। उन्होंने कहा कि ईरान अपनी संप्रभुता और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए निर्णायक कार्रवाई करेगा।

 

समंदर में ‘इकोनॉमिक चोकहोल्ड’

जमीनी हकीकत यह है कि शांति वार्ताओं के बीच अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ईरान के खिलाफ अब तक की सबसे कड़ी समुद्री नाकेबंदी लागू कर दी है। एडमिरल ब्रैड कूपर के अनुसार, ईरान के समुद्री व्यापार को 36 घंटों के भीतर पूरी तरह ठप कर दिया गया है, जिससे वहां की 90 प्रतिशत अर्थव्यवस्था सांस लेने के लिए संघर्ष कर रही है। अमेरिकी विध्वंसक जहाज ईरानी बंदरगाहों की ओर जाने वाले हर कार्गो को बीच समुद्र में ही रोक रहे हैं।

बता दें कि इस युद्ध में अब तक करीब 5,000 लोगों की जान जा चुकी है और तेल की कीमतें $96 प्रति बैरल के स्तर पर बनी हुई हैं। पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर के साथ गृह मंत्री मोहसिन नकवी और तकनीकी विशेषज्ञों का दल तेहरान में ईरानी नेतृत्व को ट्रंप प्रशासन का ‘अंतिम संदेश’ देने पंहुचा है। अगर यह मिशन विफल रहता है, तो ट्रंप की ’48 घंटे’ वाली भविष्यवाणी शांति के बजाय एक और बड़े हमले का संकेत हो सकती है।

 


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