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मार्च 2026 में ₹1.17 लाख करोड़ की सबसे बड़ी बिकवाली
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2026 में अब तक FPI ने ₹1.51 लाख करोड़ निकाले, DII की खरीद से आंशिक सहारा
✍️ प्रहरी संवाददाता मुंबई | भारतीय इक्विटी बाजार में जनवरी 2025 से जारी उतार-चढ़ाव अब डीप मार्केट करेक्शन में बदल चुका है, जहां विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने बाजार पर दबाव बनाए रखा है। 6 अप्रैल के कारोबारी सत्र में भी कमजोरी का रुख जारी रहा, जिससे सेंटिमेंट दबाव में बना रहा।
BSE Sensex चालू कैलेंडर वर्ष 2026 में अब तक करीब 15 प्रतिशत गिर चुका है। बीएसई और ट्रेडिंग इकोनॉमिक्स के आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2025 में 86,159 के अपने सर्वकालिक उच्च स्तर से फिसलकर यह 2 अप्रैल 2026 को 73,319 पर बंद हुआ।
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के डेटा के मुताबिक, इस अवधि में कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन घटकर 421.44 लाख करोड़ रुपये रह गया है, जो अपने उच्च स्तर करीब 5.3 ट्रिलियन डॉलर (465 लाख करोड़ रुपये) से काफी नीचे है। रिपोर्ट के अनुसार, पीक से अब तक बाजार पूंजीकरण में करीब 533 अरब डॉलर यानी लगभग 44 लाख करोड़ रुपये की गिरावट दर्ज की गई है।
बाजार पर दबाव का मुख्य कारण विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII/FPI) की आक्रामक बिकवाली रही है। नेशनल सिक्योरिटीज डिपोजिटरी लिमिटेड के आंकड़ों के अनुसार, 2026 में जनवरी से 2 अप्रैल तक एफपीआई ने इक्विटी सेगमेंट से कुल 1,50,959 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी की है। मार्च में 1,17,775 करोड़ रुपये की बिकवाली इस अवधि की सबसे बड़ी मासिक निकासी रही। जनवरी में 35,962 करोड़ रुपये की निकासी के बाद फरवरी में 22,615 करोड़ रुपये का इनफ्लो दर्ज हुआ, जबकि अप्रैल के शुरुआती दो दिनों में ही 19,837 करोड़ रुपये की निकासी हो चुकी है।
2025 में भी यही रुझान देखने को मिला था। पूरे वर्ष के दौरान एफआईआई ने करीब 1.58 से 1.60 लाख करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी की। जनवरी 2025 में 78,027 करोड़ रुपये की रिकॉर्ड बिकवाली दर्ज हुई, जबकि मई (19,860 करोड़ रुपये) और अक्टूबर (14,610 करोड़ रुपये) में खरीदारी से अस्थायी राहत मिली। इसके बावजूद, वर्ष के अधिकांश महीनों में विदेशी बिकवाली का दबाव बना रहा।
होल्डिंग पैटर्न में बदलाव भी स्पष्ट है। विदेशी हिस्सेदारी घटने के बीच घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने खरीद बढ़ाई है। एनएसई और ट्रेंडलाइन के अनुसार, डीआईआई की लगातार खरीदारी ने बाजार में आंशिक संतुलन बनाए रखने में भूमिका निभाई है।
