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न्यूक्लियर पावर महाशक्तियों की जुगलबंदी से बदला ग्लोबल पावर गेम; यूक्रेन युद्ध के बीच वाशिंगटन को सीधी चुनौती
✍️ प्रहरी संवाददाता, बीजिंग | अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के चीन दौरे के महज 10 दिन बाद रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन बीजिंग पहुंच चुके हैं, जहां चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने उनका भव्य और रणनीतिक स्वागत किया। यूक्रेन युद्ध के भीषण मोड़ पर होने के बीच, बीजिंग कैपिटल इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर चीनी विदेश मंत्री वांग यी की अगुवाई और चीनी युवाओं की नारेबाजी ने साफ कर दिया कि यह दौरा सिर्फ कूटनीतिक औपचारिकता नहीं, बल्कि वाशिंगटन को एक खुली चुनौती है। अमेरिकी राष्ट्रपति के खाली हाथ लौटते ही चीन और रूस ने अपनी रणनीतिक साझेदारी की 30वीं वर्षगांठ पर अभूतपूर्व एकजुटता का प्रदर्शन किया है।
द्विपक्षीय बैठक से ठीक पहले पुतिन ने चीन के साथ संबंधों को “अभूतपूर्व स्तर” पर बताते हुए वैश्विक संतुलन के लिए इसे बेहद जरूरी करार दिया।
दरअसल, ट्रंप अपने बीजिंग दौरे पर ताइवान मुद्दे पर जिनपिंग से सख्त लहजा सुन चुके हैं और अमेरिकी कारोबारी भी वहां से खाली हाथ लौटे हैं। ऐसे में ट्रंप के जाते ही पुतिन को गले लगाकर जिनपिंग ने साफ संदेश दे दिया है कि अमेरिका के दबाव के बावजूद चीन रूस का साथ नहीं छोड़ेगा।
इस महामिलन का असल मकसद यूक्रेन युद्ध के बीच दोनों देशों के व्यापारिक और सैन्य तालमेल को नए शिखर पर ले जाना है। पुतिन इस यात्रा से चीन से बड़े सैन्य और आर्थिक सहयोग की उम्मीद कर रहे हैं, ताकि पश्चिमी प्रतिबंधों को बेअसर किया जा सके।
लगातार दो महाशक्तियों की मेजबानी कर बीजिंग ने खुद को ग्लोबल पॉलिटिक्स के केंद्र में स्थापित कर लिया है। अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि पुतिन और जिनपिंग की यह जुगलबंदी यूक्रेन युद्ध की दिशा और नए वैश्विक समीकरणों को किस तरह तय करती है।
