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ईंधन की कीमतों में भारी उछाल: विपक्ष ने घेरा, कहा- ‘मोदी सरकार की गलतियों की सजा भुगत रही जनता’

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पेट्रोल और डीजल के दामों में 3 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि

✍️ डिजिटल न्यूज डेस्क, नई दिल्ली | देशभर में पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की कीमतों में हुई हालिया बढ़ोतरी ने एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। शुक्रवार को सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों द्वारा पेट्रोल और डीजल के दामों में 3 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि के बाद विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। दिल्ली और मुंबई सहित कई प्रमुख शहरों में सीएनजी की कीमतों में भी 2 रुपये प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी की गई है, जिससे आम आदमी की जेब पर बोझ और बढ़ गया है। विपक्ष का आरोप है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों का बहाना बनाकर सरकार अपनी आर्थिक विफलताओं का बोझ जनता पर डाल रही है।

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस मूल्य वृद्धि को ‘3 रुपये का झटका’ करार देते हुए कहा कि मोदी सरकार की गलतियों की कीमत देश की जनता को चुकानी पड़ रही है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यह तो सिर्फ शुरुआत है और बाकी की वसूली किश्तों में की जाएगी।

वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि भारत में मौजूदा आर्थिक संकट का मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां नहीं, बल्कि मोदी सरकार का नेतृत्व संकट है। खड़गे ने सोशल मीडिया पर तर्क दिया कि जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें कम थीं, तब सरकार ने जनता को राहत देने के बजाय केंद्रीय करों के माध्यम से 43 लाख करोड़ रुपये की कमाई की, लेकिन अब महंगाई का बोझ फिर से आम लोगों पर डाल दिया गया है।

अन्य विपक्षी नेताओं ने भी सरकार की इस कार्रवाई को चुनाव केंद्रित राजनीति से प्रेरित बताया। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने प्रधानमंत्री के ईंधन बचाने के आह्वान पर कटाक्ष करते हुए साइकिल को एकमात्र विकल्प बताया, जबकि तृणमूल कांग्रेस की सागरिका घोष और डेरेक ओ’ब्रायन ने सरकार पर ‘वोट लूटने के बाद चोट करने’ का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान कीमतों को स्थिर रखा गया और प्रक्रिया पूरी होते ही बोझ बढ़ा दिया गया। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय और वामपंथी दलों (CPI-M और CPI) ने भी इस बढ़ोतरी को तत्काल वापस लेने की मांग की है। विशेषज्ञों और विपक्षी दलों का मानना है कि ईंधन के दामों में इस वृद्धि से परिवहन लागत बढ़ेगी, जिसका सीधा असर आवश्यक वस्तुओं की कीमतों और आम जनता की आर्थिक स्थिति पर पड़ेगा।


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