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भ्रष्टाचार में महाराष्ट्र की ‘बादशाहत’ बरकरार, NCRB रिपोर्ट में लगातार 11वें साल देश में अव्वल

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✍️ डिजिटल न्यूज डेस्क, नई दिल्ली/मुंबई | नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) द्वारा जारी ‘क्राइम इन इंडिया 2024’ की ताजा रिपोर्ट ने एक बार फिर प्रशासनिक पारदर्शिता के दावों पर सवालिया निशान लगा दिया है। सरकारी तंत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि महाराष्ट्र इस सूची में न केवल शीर्ष पर है, बल्कि उसने लगातार 11वें साल भी अपना पहला स्थान बरकरार रखा है।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, साल 2024 में महाराष्ट्र में भ्रष्टाचार के कुल 721 मामले दर्ज किए गए हैं, जो राज्य में शासन और प्रशासन के स्तर पर व्याप्त चुनौतियों की ओर इशारा करते हैं। ये तब है, जब केंद्र और राज्य में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है।

देश के अन्य राज्यों की तुलना में महाराष्ट्र का यह आंकड़ा काफी अधिक है। सूची में दूसरे स्थान पर तमिलनाडु है, जहां भ्रष्टाचार के 364 मामले दर्ज किए गए हैं, जो महाराष्ट्र के मामलों की तुलना में लगभग आधे हैं। वहीं, राजस्थान 325 मामलों के साथ तीसरे और कर्नाटक 298 मामलों के साथ चौथे स्थान पर बना हुआ है। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में दर्ज मामलों की संख्या 152 रही, जो अन्य शीर्ष राज्यों की तुलना में काफी कम है। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि महाराष्ट्र में भ्रष्टाचार की जड़ें अन्य विकसित राज्यों की तुलना में कहीं अधिक गहरी हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि ‘प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट’ के तहत दर्ज होने वाली इन एफआईआर (FIR) में सबसे बड़ी संख्या रिश्वतखोरी यानी ‘ट्रैप केस’ की होती है।

महाराष्ट्र में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की उच्च सक्रियता को भी इन आंकड़ों के पीछे की एक वजह माना जाता है, क्योंकि यहां अन्य राज्यों के मुकाबले अधिकारियों पर कार्रवाई की दर अधिक है।

हालांकि, रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया है कि मामलों के दर्ज होने की तुलना में अदालतों में उन्हें सिद्ध करने और सजा दिलाने की धीमी गति अब भी एक गंभीर समस्या बनी हुई है, जिसके कारण भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के ठोस परिणाम नहीं मिल पा रहे हैं।


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