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ट्रंप के ‘टैरिफ वॉर’ पर फेडरल कोर्ट का हथौड़ा: 10% ग्लोबल टैक्स को गैरकानूनी करार देकर किया रद्द

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✍️ डिजिटल न्यूज डेस्क, न्यूयॉर्क | ​ईरान के साथ बढ़ते युद्ध के तनाव के बीच व्हाइट हाउस को न्यायिक मोर्चे पर तगड़ा झटका लगा है। फेडरल कोर्ट ने राष्ट्रपति ट्रंप की महत्वाकांक्षी ग्लोबल टैरिफ योजना की हवा निकालते हुए उसे अधिकारों का उल्लंघन बताया है।

सत्ता की मनमानी पर अंकुश: कोर्ट ने कहा- ‘पुराने कानून का गलत इस्तेमाल’

अमेरिकी फेडरल ट्रेड कोर्ट ने अपने ऐतिहासिक फैसले में ट्रंप प्रशासन के उस फैसले को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसके तहत दुनिया भर से आने वाले सामानों पर 10% का ग्लोबल टैरिफ थोपा गया था। 2-1 के बहुमत से आए इस फैसले में जजों ने स्पष्ट किया कि 1974 के ‘व्यापार अधिनियम’ की धारा 122 का सहारा लेकर राष्ट्रपति अपनी मर्जी से टैक्स नहीं बढ़ा सकते। कोर्ट ने फटकार लगाते हुए कहा कि जिस कानून को 1970 के दशक के विशेष वित्तीय संकटों के लिए बनाया गया था, उसे आज के ‘व्यापार घाटे’ का बहाना बनाकर लागू करना पूरी तरह गलत है।

राष्ट्रपति की ‘असीमित शक्तियों’ को चुनौती

जज मार्क ए. बार्नेट और क्लेयर आर. केली ने फैसले में कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि अगर प्रशासन की इस दलील को मान लिया जाता, तो राष्ट्रपति को असीमित टैरिफ लगाने की छूट मिल जाती, जो लोकतंत्र के लिए खतरनाक है।

ट्रंप सरकार यह साबित करने में नाकाम रही कि देश में ऐसा कोई आपातकालीन ‘भुगतान-संतुलन’ संकट है जो इतने बड़े टैरिफ को जायज ठहराए। फरवरी में लागू किए गए इन टैरिफ्स को कोर्ट ने राष्ट्रपति की अधिकार सीमा से बाहर का कदम माना है।

सुप्रीम कोर्ट के बाद अब फेडरल कोर्ट की ‘सर्जिकल स्ट्राइक’

यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप की व्यापारिक नीतियों को अदालती फटकार मिली है। इसी साल की शुरुआत में सुप्रीम कोर्ट ने भी उनकी पिछली टैरिफ व्यवस्था को रद्द कर दिया था। हालांकि, जज टिमोथी स्टैंसियू ने ट्रंप के पक्ष में असहमति जताई, लेकिन बहुमत के फैसले ने फिलहाल सरकार के हाथ बांध दिए हैं। अब इस कानूनी लड़ाई का अगला पड़ाव ‘फेडरल सर्किट अपीलीय कोर्ट’ होगा, जहां ट्रंप प्रशासन इस फैसले को चुनौती देने की तैयारी में है।

ईरान के साथ युद्ध की आहटों के बीच, घरेलू मोर्चे पर मिली यह कानूनी शिकस्त ट्रंप की आर्थिक रणनीति के लिए एक बड़ी बाधा साबित हो सकती है।

 


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