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बॉम्बे हाई कोर्ट ने गैंगरेप आरोपियों की सजा को बदला

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शक्ति मिल्स गैंगरेप मामले में तीन दोषियों की मौत की सजा को उम्रकैद में बदला

मुंबई। बंबई उच्च न्यायालय ने वर्ष 2013 में मध्य मुंबई स्थित शक्ति मिल परिसर में 22 वर्षीय फोटो जर्नलिस्ट के साथ सामूहिक बलात्कार के मामले के तीन दोषियों को सुनाई गई मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया।

अदालत ने कहा कि वे ‘उनके द्वारा किए गए अपराधों का पश्चाताप करने के लिए आजीवन कारावास की सजा भुगतने के पात्र हैं। दोषी पैरोल या फरलो के हकदार नहीं होंगे, क्योंकि उन्हें समाज में आत्मसात होने की अनुमति नहीं दी जा सकती और सुधार की कोई गुंजाइश नहीं है।’

पीठ ने कहा कि वह इस बात से इनकार नहीं कर सकती कि इस अपराध ने समाज की सामूहिक अंतरात्मा को झकझोर दिया और बलात्कार मानवाधिकारों का उल्लंघन है। न्यायमूर्ति साधना जाधव और न्यायमूर्ति पृथ्वीराज चव्हाण की खंडपीठ ने विजय जाधव, मोहम्मद कासिम शेख उर्फ कासिम बंगाली और मोहम्मद अंसारी को सुनाई गई मौत की सजा की पुष्टि करने से इनकार कर दिया और उनकी सजा को उनके शेष जीवन के लिए आजीवन कारावास में बदल दिया।

निचली अदालत ने 22 अगस्त 2013 को शक्ति मिल परिसर में फोटो पत्रकार के साथ सामूहिक बलात्कार किए जाने के मामले में मार्च 2014 में चार लोगों को दोषी ठहराया था। अदालत ने जाधव, बंगाली और अंसारी को मौत की सजा सुनाई थी। इन तीनों ने इस घटना से कुछ महीने पहले इसी स्थान पर 19 वर्षीय एक टेलीफोन ऑपरेटर के साथ भी सामूहिक बलात्कार किया था। इस मामले में भी अदालत ने तीनों को दोषी ठहराया था। इन तीनों को भारतीय दंड संहिता की धारा 376 (ई) के तहत मौत की सजा सुनाई गई थी।


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