-
नीट परीक्षा रद्द होने से 23 लाख युवाओं के सपनों पर ग्रहण
-
छात्रों का फूटा गुस्सा; विपक्ष ने सरकार और एनटीए को कठघरे में खड़ा किया
✍️ डिजिटल न्यूज डेस्क, नई दिल्ली | मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी 2026 रद्द होने के बाद देशभर में छात्रों और अभिभावकों के बीच भारी आक्रोश और बेचैनी फैल गई है। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) द्वारा पेपर लीक के आरोपों के बीच परीक्षा निरस्त किए जाने से 23 लाख से अधिक अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटक गया है। वर्षों की मेहनत, त्याग और उम्मीदों के टूटने से छात्र खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं, जबकि विपक्ष ने इसे शिक्षा व्यवस्था की सबसे बड़ी विफलताओं में से एक करार दिया है।
तीन मई को आयोजित नीट-यूजी 2026 परीक्षा को मंगलवार को रद्द करते हुए केंद्र सरकार ने मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी। एनटीए ने घोषणा की कि परीक्षा दोबारा आयोजित की जाएगी और नई तारीखों का ऐलान सात से दस दिनों के भीतर किया जाएगा।

पेपर लीक के खुलासे के बाद राजधानी दिल्ली से लेकर मुंबई, कोलकाता, देहरादून और शिमला तक छात्रों में गहरा रोष दिखाई दिया। दिल्ली के अभ्यर्थी निखिल कुमार ने कहा कि उन्हें अच्छे स्कोर की उम्मीद थी, लेकिन अब फिर उसी मानसिक दबाव और अनिश्चितता के साथ तैयारी करनी पड़ेगी। कोलकाता की छात्रा मौमिता दास ने कहा कि यह सिर्फ परीक्षा रद्द होना नहीं, बल्कि वर्षों की अनुशासित मेहनत का बिखर जाना है।
मुंबई में भी छात्रों का आक्रोश खुलकर सामने आया। उपनगर के अभ्यर्थी आदित्य सावंत ने कहा कि दो वर्षों की कठिन तैयारी के बाद परीक्षा रद्द होना मानसिक आघात जैसा है। वहीं परेल की छात्रा श्रुति नायर ने इसे “कभी न खत्म होने वाला दुस्वप्न” बताया। उनका कहना है कि बार-बार की अनिश्चितता छात्रों को मानसिक और शैक्षणिक रूप से तोड़ रही है।
शिमला की छात्रा सोनाक्षी पंडित ने एनटीए की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि परीक्षा की गोपनीयता बनाए रखने में एजेंसी की विफलता का खामियाजा छात्रों को भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने मांग की कि मेडिकल प्रवेश परीक्षा का संचालन एम्स-दिल्ली जैसे विश्वसनीय संस्थान से कराया जाए।
इधर, कांग्रेस की छात्र इकाई एनएसयूआई ने दिल्ली में विरोध प्रदर्शन कर सरकार और एनटीए के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों के हाथों में “पेपर लीक, मोदी सरकार वीक” और “डॉक्टर की डिग्री बिकाऊ है” जैसे पोस्टर दिखाई दिए।
विपक्ष ने भी सरकार पर तीखे हमले किए। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि लाखों छात्रों की मेहनत भ्रष्ट व्यवस्था की भेंट चढ़ गई। आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने आरोप लगाया कि सरकार केवल आंदोलन की भाषा समझती है।
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने सवाल उठाया कि दोबारा परीक्षा में पेपर लीक नहीं होगा, इसकी क्या गारंटी है।
पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा कि जो सरकार एक परीक्षा पारदर्शी ढंग से नहीं करा सकती, वह देश चलाने में भी अक्षम है।
इस बीच, सीबीआई ने आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी के तहत प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। राजस्थान पुलिस के विशेष अभियान समूह (एसओजी) ने दावा किया है कि परीक्षा से पहले छात्रों के बीच प्रसारित “गेस पेपर” के कई सवाल वास्तविक प्रश्नपत्र से मेल खाते थे।
एनटीए महानिदेशक अभिषेक सिंह ने प्रश्नपत्र लीक को “बेहद दुखद” बताते हुए कहा कि एजेंसी इसकी पूरी जिम्मेदारी लेती है। उन्होंने कहा कि यदि एक भी प्रश्न लीक हुआ है, तो यह शून्य त्रुटि की नीति का उल्लंघन है और इसी वजह से परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया गया।
