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पीएम इंटर्नशिप योजना की हवा निकली

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  • 6.21 लाख आवेदन, लेकिन जॉइनिंग 9 हजार भी नहीं

  • अब सरकार ने ही पूछ लिया- देश की बड़ी कंपनियों से युवा आखिर भाग क्यों रहे हैं?

✍️ डिजिटल न्यूज डेस्क, नई दिल्ली | देश के युवाओं को कॉरपोरेट दुनिया से जोड़ने और “स्किल इंडिया” का नया मॉडल बताकर लॉन्च की गई प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना सवालों के घेरे में आ गई है। योजना की सबसे बड़ी विडंबना यह रही कि पहले चरण में 6.21 लाख युवाओं ने आवेदन तो किए, लेकिन सरकार के मुताबिक करीब 82 हजार ऑफर जारी होने के बाद भी केवल लगभग 28 हजार युवाओं ने ऑफर स्वीकार किए और अंततः महज 8,700 से 8,760 युवा ही इंटर्नशिप जॉइन करने पहुंचे। यानी हर 100 आवेदकों में मुश्किल से 1 से 2 युवा ही योजना तक पहुंचे। अब इस शर्मनाक भागीदारी ने सरकार और कॉरपोरेट सेक्टर – दोनों के दावों की चमक फीकी कर दी है।

कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय की सचिव दीप्ति गौर मुखर्जी ने पहली बार खुलकर बड़ी कंपनियों की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि देश की शीर्ष 2,000 कंपनियां भी युवाओं को आकर्षित नहीं कर पा रही हैं, तो यह “गंभीर चिंता” का विषय है। उन्होंने उद्योग जगत को साफ संदेश दिया कि आज का युवा केवल स्टाइपेंड के लिए काम नहीं करना चाहता, बल्कि वह सीखने, सम्मान और बेहतर कार्यसंस्कृति की अपेक्षा रखता है।

उद्योग मंडल कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री के कार्यक्रम में मुखर्जी की टिप्पणी ने यह संकेत भी दिया कि सरकार अब इस विफलता का पूरा ठीकरा युवाओं पर फोड़ने के बजाय कॉरपोरेट सेक्टर से भी जवाब मांगने लगी है।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना की घोषणा केंद्रीय बजट 2024-25 में की गई थी। सरकार ने अगले पांच वर्षों में देश की शीर्ष 500 कंपनियों के जरिए एक करोड़ युवाओं को इंटर्नशिप देने का लक्ष्य रखा था। योजना के तहत 18 से 25 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं को 12 महीने की इंटर्नशिप और हर महीने 9,000 रुपये की सहायता देने का प्रावधान किया गया।

लेकिन शुरुआती आंकड़ों ने योजना की जमीनी सच्चाई सामने ला दी है। भारी प्रचार, बड़े कॉरपोरेट ब्रांड और सरकारी दावों के बावजूद युवाओं की बेरुखी ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या कंपनियां इंटर्नशिप को प्रतिभा निर्माण के बजाय सस्ते श्रम के मॉडल की तरह चला रही हैं।

इतना ही नहीं प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना के प्रचार-प्रसार पर सरकार ने अब तक भारी भरकम रकम खर्च किया है। राज्यसभा में दिए गए आधिकारिक जवाब के अनुसार,
वित्त वर्ष 2024-25 में पीएम इंटर्नशिप योजना के लिए पहले 2,000 करोड़ रुपये का बजट रखा गया था, हालांकि जिसे बाद में घटाकर 380 करोड़ रुपये कर दिया गया था।  वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भी 10,831.07 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित किया गया है।

सरकार के भीतर भी अब यह माना जा रहा है कि केवल पोर्टल लॉन्च करने और अवसरों की संख्या गिनाने से युवाओं का भरोसा नहीं जीता जा सकता। बड़ी कंपनियों के चमकदार दफ्तरों और कॉरपोरेट अभियानों के बीच यह योजना फिलहाल युवाओं के उत्साह से ज्यादा उनकी निराशा की कहानी बनती दिखाई दे रही है।


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