✍🏻 डिजिटल न्यूज डेस्क, नई दिल्ली | मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर देश की राजनीति में नया विवाद छिड़ गया है। समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने एसआईआर प्रक्रिया को “देशवासियों के खिलाफ एक बहुत बड़ी साज़िश” बताते हुए तीखा हमला बोला है। उन्होंने दावा किया कि यह व्यवस्था नागरिक अधिकारों को इस हद तक चोट पहुंचाएगी कि स्थिति “अंग्रेज़ों की गुलामी से भी खराब” हो सकती है।
अखिलेश यादव ने गुरुवार को एक्स पर 20 सेकंड का एक वीडियो साझा कर लिखा- “यह लोकतंत्र के साथ धोखाधड़ी है। आज वोट काटा जा रहा है, कल जमीन, मकान, राशन, जाति और आरक्षण से नाम काटा जाएगा, और आगे चलकर बात बैंक खातों व मध्यम वर्ग के लॉकरों तक पहुंच जाएगी।” उन्होंने विपक्षी दलों ही नहीं, बल्कि एनडीए के सहयोगी दलों से भी अपील की कि वे “भाजपा के महा-षड्यंत्र का पर्दाफाश करने के लिए एकजुट हों।”
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सपा प्रमुख का आरोप है कि “चुनावी व्यवस्था का अपहरण भाजपा, उसके संगी-साथियों और निर्वाचन आयोग के कुछ भ्रष्ट लोगों की तिकड़ी कर रही है।” उन्होंने कहा कि जनता को अपने वोट की सुरक्षा के लिए सतर्क रहना चाहिए, वरना “कल को यही व्यवस्था देशवासियों को ही पराया साबित कर देगी।”
उधर, भाजपा ने अखिलेश के आरोपों को “भ्रम फैलाने का कुत्सित प्रयास” बताया है। पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता हरिश्चंद्र श्रीवास्तव ने कहा, “डिजिटल इंडिया में जनता को सच पता है, उसे गुमराह नहीं किया जा सकता। विपक्ष ने 2024 के चुनावों में भी ऐसा माहौल बनाने की कोशिश की थी, लेकिन जनता ने उसे नकार दिया।”
भाजपा के अनुसार राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारी विपक्षी दलों को बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) नियुक्त करने की अपील कर चुके हैं, ताकि एसआईआर प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से चले और किसी को शिकायत का अवसर न मिले। फिलहाल यह प्रक्रिया पश्चिम बंगाल समेत 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चल रही है।
