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आईपीसी 498-A में बिना जांच गिरफ्तारी की तो खैर नहीं…

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-त्रिपुरा हाई कोर्ट ने जारी की पुलिसकर्मियों के लिए सख्त गाइडलाइंस

डिजिटल न्यूज डेस्क, अगरतला। त्रिपुरा हाई कोर्ट ने दहेज प्रथा (धारा 498-ए) मामलों में तुरंत गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। हाई कोर्ट ने जुलाई 2023 के सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला दिया है और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 498 ए के तहत तुरंत गिरफ्तारी को रोकने के आदेश दिए हैं। हाई कोर्ट ने इस संबंध में पुलिस के लिए दिशानिर्देश भी जारी किए हैं। हाई कोर्ट ने यह भी कहा है कि अगर निर्देशों का पालन नहीं हुआ, तो इसे अदालत की अवमानना मानी जाएगी और संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई होगी।

बता दें कि देश में दहेज प्रथा की धारा को लेकर काफी समय से विवाद है। धारा 498-ए में तुरंत गिरफ्तारी के प्रावधान है। इस मामले में दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए इसी साल सुप्रीम कोर्ट ने अपना एक आदेश जारी किया है। इसके तहत धारा 498-ए के तहत तुरंत गिरफ्तारी नहीं हो सकेगी। जांच अधिकारियों को किसी आरोपी को गिरफ्तार करने से पहले सीआरपीसी की धारा 41 में उल्लिखित मापदंडों की एक चेकलिस्ट भरनी होती है।

बताने होंगे गिरफ्तारी के कारण

हाई कोर्ट ने यह भी कहा है कि मजिस्ट्रेट जो कारणों को दर्ज किए बिना हिरासत को अधिकृत करते हैं, वे भी उच्च न्यायालय की विभागीय कार्रवाई के लिए उत्तरदायी होंगे। उच्च न्यायालय के निर्देशों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पुलिस अधिकारी धारा 498-ए मामलों में अनावश्यक रूप से अभियुक्तों को गिरफ्तार न करें और मजिस्ट्रेट आकस्मिक और यांत्रिक रूप से निरोध को अधिकृत न करें।

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