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PM ने इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए भ्रष्टाचार को वैध किया : कांग्रेस

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डिजिटल न्यूज डेस्क, नई दिल्ली। कांग्रेस पार्टी ने मोदी सरकार पर हमलावर रुख अपनाते हुए इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी वाली एसआईटी से जांच कराने की मांग की है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी ने इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए भ्रष्टाचार को वैध किया है।

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया है कि स्टेट बैंक ऑफ बॉन्ड की डिटेल्स को उजागर करने को लेकर सुप्रीम कोर्ट से 30 जून तक के समय की मांग इसलिए की गई, क्योंकि मोदी सरकार नहीं चाहती थी कि इससे जुड़ी जानकारी जनता के सामने आ जाए।

रमेश ने सिलसिलेवार तरीके से इलेक्टोरल बॉन्ड पर मोदी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि सरकार ने चार रास्तों के जरिए बॉन्ड के माध्यम से भ्रष्टाचार किया है। इनमें पहला तरीका ‘चंदा दो, धंधा लो’ का है, जिसके जरिए 38 कॉरपोरेट समूहों ने इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए चंदा दिया। बदले में इन्हें सरकार की ओर से 179 इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़े प्रोजेक्ट मिले, जिनकी कीमत करीब 3.8 लाख करोड़ थी। इन ग्रुप्स ने 2000 करोड़ से ज्यादा का चंदा बीजेपी को दिया है।

रमेश ने कहा कि 192 मामलों में चंदा मिलने के तीन महीने के भीतर ही कंपनियों को 1.32 लाख करोड़ के प्रोजेक्ट्स क्लियर कर दिए गए।

इसके बाद दूसरा तरीका 'ठेका लो, रिश्वत दो' से जुड़ा है। इसमें ठेके के बदले चंदा रिश्वत के तौर पर दिया गया। उन्होंने कहा कि इसके तहत 49 कंपनियों ने 62 हजार करोड़ के प्रोजेक्ट्स मिलने के तीन महीने के भीतर बीजेपी को 580 करोड़ की पोस्टपेड रिश्वत बॉन्ड के रूप में दी।

कांग्रेस नेता ने बीजेपी सरकार पर हफ्ता वसूली का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ऐसे 41 कॉरपोरेट ग्रुप हैं, जिन्हें ईडी, सीबीआई और आईटी जांच का सामना करना पड़ा। इन सभी ने 2,592 करोड़ रुपये बीजेपी को दिए, जिसमें से 1853 करोड़ रुपये रेड पड़ने के बाद दिए गए।
चौथे तरीके के तौर पर कांग्रेस नेता ने फर्जी कंपनियों के बारे में विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि 16 फर्जी कंपनियों ने करीब 419 करोड़ रुपये का चंदा बीजेपी को दिया है। साल 2019 के घोषणापत्र में कांग्रेस ने वादा किया था कि सत्ता में आने के बाद उनकी सरकार इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम को खत्म कर देगी, क्योंकि इससे सत्तारूढ़ दल को फायदा मिलता है।

इलेक्टोरल बॉन्ड को चंदा-धंधा घोटाला करार देते हुए रमेश ने कहा कि जो सरकार किसानों के लिए एमएसपी यानी मिनिमम सपोर्ट प्राइस को कानूनी दर्जा नहीं देना चाहती, उसने चंदे के जरिए घूस को कानूनी दर्जा दे दिया है। अगर इंडिया गठबंधन की सरकार बनती है, तो अडानी के मामले पर जेपीसी जांच के साथ-साथ पीएम केयर्स फंड की भी एसआईटी जांच होगी।

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