उच्चतम न्यायालय में हलफनामा दायर, आरबीआई ने की थी सिफारिश
नई दिल्ली। नोटबंदी को लेकर हो रही आलोचनाओं व विफलता के आरोपों के बीच केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दायर करते हुए कहा कि वर्ष 2016 में की गई नोटबंदी बहुत ही सोच-विचार के बाद लिया गया फैसला था। यह फैसला जाली नोट, आतंकवाद के वित्तपोषण, काले धन पर लगाम और टैक्स चोरी जैसी समस्याओं से निपटने की एक बड़ी रणनीति के हिस्से के रूप में लिया गया था।
बता दें कि नोटबंदी के 6 साल बाद देश में नकद के चलन में भारी इजाफा हुआ है। कैश सर्कुलेशन का आंकड़ा 30.88 लाख करोड़ रुपये की नई ऊंचाई पर पहुंच गया है। सरकार ने आनन-फानन में नवंबर 2016 को जब नोटबंदी का फैसला किया था, तब कैश सर्कुलेशन 17.97 लाख करोड़ रुपये था। आज नकदी में चलन 71.84 पर्सेंट अधिक हो गया है।

नोटबंदी के मामले पर सुनवाई पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ कर रही है। हलफनामे में केंद्र सरकार ने कहा है कि नोटबंदी का निर्णय रिजर्व बैंक के केंद्रीय निदेशक मंडल की विशेष अनुशंसा पर लिया गया था। आरबीआई ने इसके क्रियान्वयन के लिए योजना के मसौदे का प्रस्ताव भी दिया था। अब अगली सुनवाई 24 नवंबर को होगी।