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बीएमसी चुनाव परिणाम: भाजपा की जीत के शोर में छिपी ‘शिंदे’ की असली ताकत

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साम दाम दंड भेद अपनाने के बाद भी पिछले चुनाव से 7 सीटें ज्यादा जीत कर सबसे बड़ी पार्टी बनी बीजेपी

✍🏻 डिजिटल न्यूज डेस्क, मुंबई | बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव 2025-26 के परिणामों ने मुंबई की राजनीति को एक नया मोड़ दे दिया है। यद्यपि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) 89 सीटों के साथ सबसे बड़े दल के रूप में उभरी है और जश्न मना रही है, लेकिन आंकड़ों की गहराई में जाने पर कहानी कुछ और ही नजर आती है। यह परिणाम भाजपा के लिए किसी ‘लहर’ का संकेत नहीं, बल्कि राजनीतिक अंकगणित की जीत है।

भाजपा: बढ़त या सिर्फ ठहराव?

2017 में भाजपा के पास 82 सीटें थीं, जो अब बढ़कर 89 हो गई हैं। केंद्र और राज्य दोनों जगह सत्ता में होने और पूरी मशीनरी झोंकने के बावजूद, नौ साल में मात्र 7 सीटों का इजाफा किसी बड़े जनादेश की ओर इशारा नहीं करता। भाजपा को मेयर पद जनता के प्रचंड समर्थन से नहीं, बल्कि गठबंधन के आंकड़ों के सहारे मिला है। मुंबई ने भाजपा को स्पष्ट बहुमत न देकर यह जता दिया है कि अभी भी उसकी राह आसान नहीं है।

शिवसेना का विभाजन: ताकत बढ़ी या घटी?

सबसे दिलचस्प पहलू शिवसेना का प्रदर्शन है। विभाजन के बाद, उद्धव ठाकरे गुट (65 सीटें) और एकनाथ शिंदे गुट (29 सीटें) ने मिलकर कुल 94 सीटें जीती हैं। 2017 में अविभाजित शिवसेना के पास 84 सीटें थीं। इसका सीधा अर्थ है कि ‘शिवसेना’ का आधार घटा नहीं, बल्कि बढ़ा है। भाजपा का वह नैरेटिव पूरी तरह ध्वस्त हो गया है जिसमें दावा किया गया था कि विभाजन के बाद उद्धव ठाकरे की शिवसेना खत्म हो जाएगी। उद्धव आज भी मुंबई में मुख्य विपक्षी ताकत बने हुए हैं।

एकनाथ शिंदे: असली ‘गेमचेंजर’

इस चुनाव के असली विजेता एकनाथ शिंदे हैं। भले ही उनकी सीटें कम हों, लेकिन उन्होंने साबित कर दिया है कि वह भाजपा की बैसाखी पर नहीं टिके हैं। उन्होंने अपना स्वतंत्र राजनीतिक आधार तैयार कर लिया है। अब बीएमसी में भाजपा बिना शिंदे के समर्थन के एक कदम नहीं चल सकती। बजट से लेकर बड़े प्रोजेक्ट्स तक, हर फैसले पर शिंदे का प्रभाव रहेगा।

शिंदे ने खुद को एक ऐसे ‘प्रेशर पॉइंट’ के रूप में स्थापित कर लिया है जिसे भाजपा नजरअंदाज नहीं कर सकती। यदि राज्य सरकार में भाजपा उन्हें किनारे करने की कोशिश करती है, तो शिंदे बीएमसी में मोर्चा खोलकर भाजपा की मुश्किलें बढ़ा सकते हैं।

कांग्रेस और अन्य दलों की हालत खस्ता

दूसरी ओर, हर चुनाव के बाद कांग्रेस (24 सीटें) और एनसीपी (3 सीटें) का पतन जारी है। 2017 के चुनाव में कांग्रेस ने 52 सीटें जीती थी, जो 9 साल बाद घटकर 24 पर सिमट गईं। कांग्रेस मुंबई की राजनीति में अप्रासंगिक होती जा रही है, जबकि राज ठाकरे की मनसे (6 सीटें) भी हाशिए पर सिमट गई है।

बीएमसी के इन नतीजों ने भाजपा को कुर्सी तो दे दी है, लेकिन नियंत्रण छीन लिया है। उद्धव ठाकरे ने अपनी जमीन बचाए रखी है, जबकि एकनाथ शिंदे ‘किंगमेकर’ बनकर उभरे हैं। अब मुंबई का रिमोट कंट्रोल भाजपा के पास नहीं, बल्कि मोलभाव करने की ताकत रखने वाले शिंदे के पास है।


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