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खराब हवा में सांस ले रही विश्व की 99 प्रतिशत आबादी

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हर साल करीब 70 लाख लोगों की मौत : डब्ल्यूएचओ

नई दिल्ली, 4 अप्रैल 2022 ।  संयुक्त राष्ट्र की स्वास्थ्य एजेंसी ने कहा है कि विश्व के करीब-करीब सभी लोग वैसी गुणवत्ता वाली हवा में सांस ले रहे हैं, जो मानक के अनुरूप नहीं है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने जीवाश्म ईंधन के उपयोग को काम करने की अपील भी की, जिसकी वजह से प्रदूषण बढ़ता है और सांस तथा रक्त के प्रवाह संबधी परेशानियां सामने आती हैं।

हवा की गुणवत्ता संबंधी दिशा-निर्देशों को सख्त करने के छह महीने बाद डब्ल्यूएचओ ने सोमवार को हालिया आंकड़े जारी किए। इसमें वैश्विक स्तर पर खराब हवा वाले महानगरों, शहरों व गांवों की संख्या में वृद्धि हुई है। अब ऐसे नगर निकायों की संख्या 6,000 से ज्यादा हो चुकी है। डब्ल्यूएचओ के पूर्वी भूमध्यसागरीय व दक्षिण पूर्व एशिया क्षेत्रों में वायु की गुणवत्ता सबसे खराब है। इसके बाद अफ्रीका का नंबर आता है।

नई दिल्ली स्थित सेंटर फार साइंस एंड एनवायरमेंट की वायु प्रदूषण विशेषज्ञ अनुमिता रायचौधरी ने कहा कि यह निष्कर्ष वायु प्रदूषण से लड़ने के लिए बड़े पैमाने पर बदलावों की जरूरत पर प्रकाश डालता है। काउंसिल आन एनर्जी, एनवायरमेंट एंड वाटर ने एक अध्ययन में पाया था कि भारत में पीएम 2.5 के 60 प्रतिशत भार की वजह घरेलू व औद्योगिक प्रदूषण है।

 


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