संजय मल्होत्रा ने दी वित्तीय तंत्र को अति-आत्मविश्वास से बचने की दो टूक चेतावनी
✍️ डिजिटल न्यूज डेस्क, मुंबई | भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने देश के वित्तीय क्षेत्र को सचेत करते हुए स्पष्ट किया है कि आज की वित्तीय सुदृढ़ता कल की सुरक्षा की गारंटी नहीं हो सकती। बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के मजबूत बही-खातों और ऐतिहासिक रूप से निचले स्तर पर मौजूद एनपीए के दौर में आया यह बयान नियामकीय हलकों में गहरा असर छोड़ रहा है।
गवर्नर ने आगाह किया कि मौजूदा दौर की तरलता, ऊंचा पूंजी पर्याप्तता अनुपात और स्थिर मुनाफा संस्थानों में एक किस्म का अति-आत्मविश्वास पैदा कर सकता है, जो भविष्य के अनपेक्षित वैश्विक और घरेलू वित्तीय झटकों के सामने उन्हें कमजोर बना देगा।
नियामक का यह कड़ा संदेश देता है कि वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, अनिश्चित ब्याज दर चक्र और मुद्रास्फीति के अप्रत्याशित दबाव किसी भी वक्त घरेलू वित्तीय तंत्र की परीक्षा ले सकते हैं। गवर्नर ने संस्थानों को नसीहत दी कि वे मौजूदा अनुकूल परिस्थितियों को स्थायी मानकर जोखिम प्रबंधन के मानकों में ढिलाई न बरतें। विशेष रूप से असुरक्षित खुदरा ऋणों में तेज वृद्धि, वित्तीय प्रौद्योगिकी के प्रसार के साथ बढ़ते साइबर और तकनीकी जोखिम, तथा जमा वृद्धि एवं ऋण उठाव के बीच के असंतुलन पर लगातार नजर रखने की जरूरत है।
केंद्रीय बैंक प्रमुख का यह रुख यह भी संकेत देता है कि नियामक भविष्य में किसी भी संभावित प्रणालीगत संकट को पनपने से पहले ही निपटने के लिए पूरी तरह मुस्तैद है। वित्तीय संस्थानों को केवल वर्तमान मुनाफे के जश्न में डूबने के बजाय अपने बफर मजबूत करने, कठोर तनाव परीक्षण जारी रखने और ऋण देने की गुणवत्ता से कोई समझौता न करने का कड़ा निर्देश दिया गया है।
