✍️ डिजिटल न्यूज डेस्क, मुंबई/नई दिल्ली |
भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर चल रही बातचीत एक ऐसे ठहराव (प्लेटो) पर पहुंच गई है, जहां से आगे बढ़ना दोनों देशों के लिए बेहद जटिल हो गया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार, 5 अक्टूबर को नई दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान स्पष्ट किया कि दोनों पक्षों के बीच कड़े और गहन मोलभाव के बाद अब एक-दूसरे से अतिरिक्त रियायतें लेना या देना “बहुत, बहुत मुश्किल” हो गया है। रिपोर्ट के अनुसार, वित्त मंत्री का यह बयान इस बात का सीधा संकेत है कि दोनों देशों के बीच इस महत्वपूर्ण समझौते पर गतिरोध पैदा हो गया है और फिलहाल बात आगे नहीं बढ़ पा रही है।
वित्त मंत्री ने बातचीत की मौजूदा स्थिति को रेखांकित करते हुए कहा कि यह बेहद कठिन और आक्रामक तरीके से आगे बढ़ाया गया वार्ता दौर रहा है, हालांकि बातचीत औपचारिक रूप से अब भी जारी है। उन्होंने संकेत दिया कि यदि दोनों पक्षों को काम करने और लचीला रुख अपनाने के लिए नए विकल्प या कोई नई गुंजाइश मिलती है, तभी दोनों देश इस दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं।
भारत और अमेरिका आर्थिक संबंधों को मजबूत करने और लंबे समय से चले आ रहे बाजार पहुंच (मार्केट एक्सेस) के मुद्दों को सुलझाने के लिए फरवरी 2025 से इस व्यापार समझौते पर लगातार बातचीत कर रहे हैं। इस बातचीत में बाजार पहुंच के अलावा टैरिफ और व्यापार असंतुलन सबसे प्रमुख और संवेदनशील विषय बने हुए हैं।
सीतारमण ने समझौते में आ रही पेचीदगियों का कारण बताते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार संतुलन वर्तमान में भारत के पक्ष में है और व्यापार घाटा अमेरिका की ओर है, जिसे वाशिंगटन किसी भी सूरत में कम करना चाहता है।
रिपोर्ट के अनुसार, इससे पहले अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) जैमीसन ग्रीर ने भी पिछले सप्ताह अमेरिका में भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के साथ हुई उच्चस्तरीय बैठक के बाद साफ कर दिया था कि यह समझौता तत्काल होने वाला नहीं है। रॉयटर्स की रिपोर्ट यह भी बताती है कि भारत इस व्यापार समझौते में अपने आर्थिक हितों की रक्षा के लिए बेहतर और संतुलित शर्तों पर अड़ा हुआ है, जिससे समझौते को अंतिम रूप देने की राह में मुश्किलें बढ़ गई हैं।
