पर्म (PERM) सर्टिफिकेशन सस्पेंड होने से ग्रीन कार्ड की कानूनी राह बंद
5 लाख भारतीय इंजीनियरों पर देश वापसी का खतरा
आईटी कंपनियों के मार्जिन पर गहरा संकट
✍️ विशेष अंतरराष्ट्रीय डेस्क, नई दिल्ली/वॉशिंगटन | अमेरिका में बसने और काम करने का सपना देख रहे लाखों भारतीय तकनीकी पेशेवरों और देश के 250 अरब डॉलर के आईटी उद्योग को अमेरिकी प्रशासन ने अब तक का सबसे बड़ा झटका दिया है। अमेरिकी श्रम विभाग ने टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस), इंफोसिस, विप्रो और एचसीएल टेक समेत शीर्ष भारतीय कंपनियों को स्थायी लेबर सर्टिफिकेशन यानी पर्म (PERM) कार्यक्रम से तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
अमेरिकी अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लैंच और श्रम विभाग द्वारा जारी सख्त आदेश के तहत इन चार भारतीय दिग्गजों के साथ कॉग्निजेंट, कैपजेमिनी, माइक्रोसॉफ्ट और एडोब को भी इस प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया है। अमेरिकी प्रशासन का आरोप है कि इन कंपनियों ने एच-1बी वीजा नियमों का दुरुपयोग कर स्थानीय अमेरिकी नागरिकों की छंटनी की और उनकी जगह कम वेतन वाले विदेशी कामगारों को तरजीह दी।
टबता दें कि पर्म सर्टिफिकेशन वह अनिवार्य और पहला कानूनी पड़ाव है, जिसके बिना कोई भी विदेशी कर्मचारी रोजगार-आधारित स्थायी निवास यानी ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन नहीं कर सकता। इस रोक का सीधा और विध्वंसक असर अमेरिका में छह साल की एच-1बी वीजा सीमा पर काम कर रहे पांच लाख से अधिक भारतीय प्रोफेशनल्स पर पड़ेगा। सामान्य नियमों के तहत एच-1बी वीजा को छह साल से आगे तभी बढ़ाया जा सकता है, जब कर्मचारी का पर्म और आई-140 स्वीकृत हो।
अब कंपनियों पर प्रतिबंध लगने से इन कर्मचारियों के ग्रीन कार्ड आवेदन अधर में लटक गए हैं। वीजा मियाद खत्म होते ही इन कुशल इंजीनियरों के सामने या तो रातोंरात अमेरिका छोड़कर भारत लौटने या फिर किसी स्थानीय अमेरिकी कंपनी में नौकरी तलाशने का संकट खड़ा हो गया है। इसके साथ ही वर्क परमिट और वीजा आवेदन शुल्कों में की गई भारी वृद्धि ने परिवारों के लिए अमेरिका में टिके रहने की लागत को असहनीय बना दिया है।
इस फैसले ने भारतीय आईटी उद्योग की रीढ़ यानी उसके ‘ऑनसाइट-ऑफशोर’ बिजनेस मॉडल की बुनियाद हिला दी है। टीसीएस, इंफोसिस, विप्रो और एचसीएल जैसी शीर्ष कंपनियों के कुल सालाना राजस्व का 50 से 60 प्रतिशत हिस्सा अकेले अमेरिकी बाजार से आता है। अब तक ये कंपनियां भारत से कुशल प्रोफेशनल्स को ऑनसाइट भेजकर कम लागत में बड़े अमेरिकी प्रोजेक्ट्स पूरे करती रही हैं।
पर्म निलंबन और कड़े वीजा नियमों के बाद कंपनियों को मजबूरन अमेरिकी धरती पर ही अत्यधिक ऊंचे वेतन पर स्थानीय अमेरिकी नागरिकों को नियुक्त करना पड़ेगा। ब्रोकरेज फर्मों और वित्तीय विश्लेषकों का अनुमान है कि स्थानीय वर्कफोर्स की ऊंची लागत के चलते भारतीय आईटी कंपनियों के ऑपरेटिंग मार्जिन में 150 से 300 बेसिस प्वाइंट की सीधी गिरावट आ सकती है, जिससे आने वाली तिमाहियों में कंपनियों के मुनाफे और नए अंतरराष्ट्रीय अनुबंध हासिल करने की क्षमता पर सीधा असर पड़ेगा।
