✍🏻 प्रहरी संवाददाता, नई दिल्ली | प्रधानमंत्री बनने से पहले नरेंद्र मोदी और उनकी पार्टी बीजेपी ने 2014 में सत्ता में आने से पहले दावा किया था कि स्विस बैंकों से काला धन वापस लाकर हर भारतीय के खाते में 15 लाख रुपए जमा किए जाएंगे। अब 11 साल बाद, 15 लाख तो दूर की बात है, लेकिन विदेशों के बैंकों में कुछ भारतीयों की जमा रकम तीन गुना जरूर हो गई है। फर्क इतना है कि जनता की जेबें खाली हैं और बीजेपी सरकार की तिजोरी में चंदा देने वाले कुछ लोगों की तिजोरियां तेजी से भर रही हैं।
जिस दौर में देश में महंगाई और बेरोज़गारी आम जनता की कमर तोड़ रही है, उसी दौर में स्विस बैंकों में भारतीयों की जमा दौलत ने छलांग लगाई है। लेकिन एक दशक पहले जिन लोगों ने ‘काला धन’ वापसी का नारा दिया था, आज भी पार्टी खामोश हो चुकी है।
साल 2024 में स्विस बैंकों में भारतीयों की जमा रकम तीन गुना बढ़कर 3.5 अरब स्विस फ्रैंक (करीब ₹37,600 करोड़) हो गई है। ये आंकड़ा 2023 के मुकाबले लगभग 238 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है, जब यह रकम सिर्फ 1.04 अरब फ्रैंक थी।
स्विस नेशनल बैंक (SNB) द्वारा जारी ताज़ा रिपोर्ट बताती है कि यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से स्थानीय शाखाओं और अन्य वित्तीय संस्थानों के जरिए जमा धन के कारण हुई है।
दिलचस्प बात ये है कि व्यक्तिगत खातों (कस्टमर अकाउंट्स) में जमा रकम मात्र 11% बढ़कर 34.6 करोड़ फ्रैंक (करीब ₹3,675 करोड़) ही रही — यानी असली खेल परदे के पीछे चल रहा है।
गौरतलब है कि स्विट्ज़रलैंड में काले धन की परिभाषा अलग है। वहां इसे “अघोषित संपत्ति” नहीं माना जाता, और न ही SNB की रिपोर्ट कथित ‘ब्लैक मनी’ की जानकारी देती है। हालांकि, यह वही स्विट्ज़रलैंड है जहां के बैंक एक समय भारतीय चुनावी भाषणों में ‘काला धन वापसी’ के प्रतीक बने हुए थे।
