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ऐतिहासिक त्रिपक्षीय समझौते से आर्कटिक में अमेरिकी सैन्य वर्चस्व स्थापित

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  • रेयर अर्थ मिनरल्स, नए शिपिंग रूट्स और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर दूरगामी असर

✍️ विशेष अंतरराष्ट्रीय डेस्क, न्यूयॉर्क | संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के बीच हस्ताक्षरित ऐतिहासिक सुरक्षा समझौते के बाद वैश्विक आर्थिक, भू-राजनीतिक और पर्यावरणीय समीकरणों में बड़े बदलाव के संकेत मिलने लगे हैं। 22 सितंबर 2026 को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड जे. ट्रंप, डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसन और ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेन्स-फ्रेडरिक नील्सन ने इस त्रिपक्षीय सुरक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए। समझौते के तहत अमेरिका को ग्रीनलैंड में स्थायी सैन्य बेसिंग अधिकार प्राप्त हुए हैं, वहीं बिना अमेरिकी अनुमति के किसी भी प्रतिद्वंद्वी देश की सैन्य उपस्थिति और संवेदनशील निवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है।

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इसे उत्तरी अमेरिका और नाटो की सुरक्षा के लिए निर्णायक रणनीतिक जीत बताया है, जबकि डेनमार्क के विदेश मंत्री लार्स लोक्के रासमुसेन के अनुसार यह कदम डेनमार्क की संप्रभुता और ग्रीनलैंड के आत्मनिर्णय के अधिकारों के दायरे में उठाया गया है।

रेयर अर्थ मिनरल्स और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर प्रभाव

इस समझौते का सीधा प्रभाव वैश्विक स्तर पर दुर्लभ मृदा तत्वों (रेयर अर्थ मिनरल्स) के बाजार और आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ने जा रहा है। यूएस जियोलॉजिकल सर्वे के अनुसार ग्रीनलैंड दुर्लभ मृदा तत्वों के वैश्विक भंडारों में आठवें स्थान पर है। यहां स्थित क्वानेफजेल्ड, तैनब्रीज और सरफारतोक जैसी प्रमुख परियोजनाओं में नियोडिमियम, प्रेजियोडिमियम सहित भारी दुर्लभ तत्वों के विपुल भंडार मौजूद हैं।

वर्तमान में चीन वैश्विक स्तर पर लगभग 60 प्रतिशत दुर्लभ खनिजों के खनन और 85 से 91 प्रतिशत रिफाइनिंग क्षमता को नियंत्रित करता है। पश्चिमी देश लंबे समय से इलेक्ट्रिक वाहनों, पवन ऊर्जा टर्बाइनों, उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स और मिसाइल मार्गदर्शन प्रणालियों के लिए आवश्यक इन महत्वपूर्ण खनिजों के मामले में चीन पर निर्भरता घटाने के प्रयास में हैं।

ग्रीनलैंड समझौते के तहत संवेदनशील निवेश पर अमेरिकी पूर्व-अनुमति की अनिवार्यता से चीनी और रूसी खनन कंपनियों की इस द्वीप तक सीधी पहुंच पर विराम लग गया है। विश्लेषकों के अनुसार सरफारतोक जैसी परियोजनाएं चीन के बाहर वैकल्पिक आपूर्ति का बड़ा केंद्र बन सकती हैं, हालांकि कठोर जलवायु, ऊर्जा की सीमित उपलब्धता, बुनियादी ढांचे के अभाव और सख्त नियामकीय प्रक्रियाओं के चलते व्यावसायिक उत्पादन शुरू होने में अभी कई वर्षों का समय लग सकता है।

आर्कटिक शिपिंग रूट्स और समुद्री व्यापार का बदलता गणित

ग्लोबल वार्मिंग के चलते आर्कटिक की समुद्री बर्फ पिघलने से नॉर्दन सी रूट (NSR) और नॉर्थवेस्ट पैसेज (NWP) जैसे नए जलमार्ग तेजी से सुगम हो रहे हैं। ये मार्ग पारंपरिक स्वेज नहर या पनामा नहर के जरिए एशिया और यूरोप के बीच होने वाले समुद्री व्यापार की दूरी को 30 से 40 प्रतिशत तक घटा देते हैं। दूरी कम होने से अंतरराष्ट्रीय शिपिंग में समय और ईंधन लागत में उल्लेखनीय बचत होगी।

ग्रीनलैंड में स्थायी अमेरिकी सैन्य ठिकानों की स्थापना से इन उभरते हुए आर्कटिक समुद्री मार्गों पर अमेरिका और नाटो सहयोगियों की निगरानी और परिचालन क्षमता मजबूत हो जाएगी। नाटो महासचिव मार्क रुट्टे, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गार स्टोरे सहित प्रमुख यूरोपीय नेताओं ने समझौते का स्वागत करते हुए इसे सामूहिक सुरक्षा और समुद्री निगरानी के लिहाज से महत्वपूर्ण बताया है। वहीं, इस रणनीतिक नियंत्रण से रूस के नॉर्दन सी रूट प्रबंधन और चीन के ‘पोलर सिल्क रोड’ के विस्तार के प्रयासों को सीधी सामरिक चुनौती मिलेगी।

आर्कटिक जलवायु और नाजुक पर्यावरण पर खनन का जोखिम

रणनीतिक लाभ के साथ-साथ इस समझौते के बाद ग्रीनलैंड में संभावित बड़े पैमाने के खनन कार्यों ने पर्यावरणविदों और वैज्ञानिकों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। विशेषज्ञों के अनुसार ओपन-कास्ट (खुली) खदानों से उड़ने वाली धूल, भारी धातुओं का रिसाव, रासायनिक अपशिष्ट और पर्माफ्रॉस्ट (स्थायी रूप से जमी बर्फ की परत) को पहुंचने वाला नुकसान आर्कटिक के संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित कर सकता है।

वैज्ञानिक अध्ययनों से स्पष्ट हुआ है कि खदानों और भारी मशीनरी से निकलने वाली धूल जब आस-पास की बर्फ और ग्लेशियरों पर जमती है, तो वह बर्फ की परावर्तनशीलता (अल्बेडो प्रभाव) को घटा देती है। इसके चलते सूर्य की गर्मी का अवशोषण बढ़ता है और बर्फ पिघलने की गति तीव्र हो जाती है। इसके अलावा, ग्रीनलैंड के दूरदराज के क्षेत्रों में ग्रिड बिजली न होने के कारण खनन और लॉजिस्टिक्स के लिए बड़े पैमाने पर डीजल जनरेटरों का उपयोग होगा, जिससे ब्लैक कार्बन और ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में तेज वृद्धि होने की आशंका है।

पूर्व की बंद हो चुकी खदानों से रिसने वाले सीसा और जस्ता जैसी धातुओं का प्रदूषण आज भी स्थानीय जल और मिट्टी में देखा जाता है, जो समुद्री जीवों और स्थानीय आबादी के लिए गंभीर पर्यावरणीय चुनौती बना हुआ है।

प्रमुख शक्तियों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभाव

अंतरराष्ट्रीय पटल पर इस समझौते ने आर्कटिक क्षेत्र में शक्ति-संतुलन को स्पष्ट रूप से विभाजित कर दिया है। यूरोपीय संघ और नॉर्डिक देशों ने इसे आर्कटिक में स्थिरता और सामूहिक सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने वाला कदम माना है। दूसरी ओर, चीन और रूस के लिए इस समझौते के तहत लगाए गए प्रतिबंधों से आर्कटिक क्षेत्र में महत्वपूर्ण बंदरगाहों, ऊर्जा बुनियादी ढांचे और खनन रियायतों में निवेश के रास्ते लगभग बंद हो गए हैं। वैश्विक खनिज बाजार, शिपिंग लॉजिस्टिक्स कंपनियां और औद्योगिक क्षेत्र अब ग्रीनलैंड सरकार द्वारा जारी की जाने वाली आगामी पर्यावरण अनुमतियों और परियोजनाओं के वित्तीय ढांचों पर टकटकी लगाए हुए हैं।


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