प्रहरी संवाददाता, मुंबई। आईएनएस सिंधुध्वज ने 35 साल की सेवा करने के बाद भारतीय नौसेना को अलविदा कह दिया। समुद्र की अथाह लहरों में भारतीय नौसेना के परचम लहराने में इस पनडुब्बी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
विशाखापत्तनम के नौसेना डॉकयार्ड में शनिवार को आयोजित डीकमीशनिंग समारोह के मुख्य अतिथि वाइस एडमिरल बिस्वजीत दास गुप्ता (फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, पूर्वी नौसेना कमान) के साथ ही 26 कमीशनिंग क्रू अधिकारियों एवं 15 पूर्व कमांडिंग ऑफिसर्स की मौजूदगी रही।
टारपीडो फायर सिस्टम, सेटेलाइट कम्युनिकेशन सिस्टम व अन्य अत्याधुनिक हथियारों से लैस आईएनएस सिंधुध्वज स्वदेशीकरण की ध्वजवाहक थी। रूस के सहयोग से निर्मित सिंधुघोष श्रेणी की पनडुब्बियों में यह भारतीय नौसेना की आत्मानिभरता में मील का पत्थर थी।
