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मंत्री के बेटे की फरारी पर हाईकोर्ट सख्त
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न्यायमूर्ति माधव जामदार की तीखी टिप्पणी
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पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
✍🏻 डिजिटल न्यूज़ डेस्क, मुंबई | मुंबई में गुरुवार को बॉम्बे हाईकोर्ट की एक तीखी टिप्पणी ने महाराष्ट्र की कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया। अदालत ने सीधे शब्दों में पूछा—क्या राज्य में कानून का राज बचा है? न्यायमूर्ति माधव जामदार ने कहा कि मंत्रियों के बच्चे अपराध करते हैं, खुलेआम घूमते हैं, अपने माता-पिता के संपर्क में रहते हैं, फिर भी पुलिस उन्हें ढूंढ नहीं पाती। यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब राज्य के मुख्यमंत्री विदेश दौरे पर हैं, जिससे सवाल और भी गहरे हो गए हैं।
यह फटकार शिवसेना नेता व मंत्री भरत गोगावले के बेटे विकास गोगावले की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान आई। महाड नगर परिषद चुनाव के दौरान हुई हिंसक झड़पों के एक मामले में विकास आरोपी है। सत्र न्यायालय से राहत न मिलने के बाद उसने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन वह अब तक फरार है। अदालत ने पूछा कि क्या मुख्यमंत्री इतने विवश हैं कि किसी मंत्री के खिलाफ एक शब्द भी नहीं कह सकते?
न्यायमूर्ति जामदार ने पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि दबाव आप पर हो सकता है, अदालत पर नहीं। अदालत ने चेताया कि यदि आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई तो उसे सख्त आदेश पारित करने पड़ेंगे। राज्य के महाधिवक्ता मिलिंद साठे ने भरोसा दिलाया कि मंत्री गोगावले अपने बेटे से बात कर शुक्रवार तक आत्मसमर्पण सुनिश्चित करेंगे।
गौरतलब है कि रायगढ़ जिले के महाड में 2 दिसंबर को हुए नगर निकाय चुनाव के दौरान एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना और अजीत पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी समर्थकों के बीच झड़पें हुई थीं। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ शिकायतें दर्ज कराईं। इस राजनीतिक टकराव के बीच हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी ने सत्ता, पुलिस और कानून के रिश्ते पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है- क्या कानून सबके लिए बराबर है?
