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महाराष्ट्र आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26: ₹51 लाख करोड़ के पार पहुंची राज्य की अर्थव्यवस्था, 7.9% विकास दर का अनुमान

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✍️ प्रहरी संवाददाता, मुंबई | राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों में पेश किए गए महाराष्ट्र के आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 ने राज्य की आर्थिक मजबूती की एक सुनहरी तस्वीर पेश की है। रिपोर्ट के अनुसार, चालू वित्त वर्ष के दौरान राज्य की अर्थव्यवस्था 7.9 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान है, जिससे महाराष्ट्र लगातार पांचवें वर्ष अपनी विकास की गति को बनाए रखने में सफल रहा है। इस वृद्धि के साथ ही महाराष्ट्र की अर्थव्यवस्था ₹51 लाख करोड़ के ऐतिहासिक आंकड़े को पार कर गई है, जो इसे भारत की सबसे बड़ी राज्य अर्थव्यवस्था के रूप में मजबूती से स्थापित करता है। कृषि, उद्योग और सेवा क्षेत्रों के संतुलित ढांचे ने इस उपलब्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

​सर्वेक्षण के अग्रिम अनुमानों के मुताबिक, वर्ष 2025-26 में महाराष्ट्र का नॉमिनल सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) ₹51,00,597 करोड़ तक पहुंचने की उम्मीद है। वहीं, स्थिर कीमतों पर आधारित रियल GSDP ₹28,82,699 करोड़ रहने का अनुमान लगाया गया है। इस आर्थिक विस्तार का मुख्य श्रेय बुनियादी ढांचे में किए गए भारी निवेश को जाता है।

पिछले कुछ वर्षों में सड़क नेटवर्क, मेट्रो सिस्टम, बंदरगाहों, हवाई अड्डों और लॉजिस्टिक कॉरिडोर के विकास के साथ-साथ डिजिटल गवर्नेंस और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में किए गए सुधारों ने राज्य की आर्थिक नींव को और मजबूत किया है।

विकास के इंजन के रूप में सेवा क्षेत्र का दबदबा बरकरार है, जिसकी विकास दर 9.0 प्रतिशत रहने का अनुमान है। वित्तीय सेवाओं, सूचना प्रौद्योगिकी और शहरी आर्थिक गतिविधियों के कारण मुंबई, पुणे, ठाणे और नागपुर जैसे शहरों में जबरदस्त उछाल देखा गया है। इसके विपरीत, विनिर्माण और निर्माण सहित औद्योगिक क्षेत्र में 5.7 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है, जबकि कृषि और संबद्ध गतिविधियों की विकास दर 3.4 प्रतिशत रहने की संभावना है। कृषि क्षेत्र की यह मध्यम वृद्धि दर्शाती है कि खेती आज भी काफी हद तक मानसून और सिंचाई सुविधाओं के विस्तार पर निर्भर है।

​राजस्व के मोर्चे पर वस्तु एवं सेवा कर (GST) राज्य सरकार की आय का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण स्रोत बना हुआ है। बजट अनुमानों के अनुसार, वर्ष 2025-26 के लिए कुल राजस्व प्राप्तियां ₹5,60,964 करोड़ तक पहुंचने की उम्मीद है। इसमें कर राजस्व का हिस्सा ₹4,77,400 करोड़ रहने का अनुमान है, जबकि केंद्र सरकार से सहायता अनुदान के रूप में ₹50,511 करोड़ मिलने की संभावना है।

वित्तीय अनुशासन के मामले में भी राज्य का प्रदर्शन सराहनीय रहा है, जहां राजकोषीय घाटा GSDP का 2.7 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो कि 3 प्रतिशत की कानूनी सीमा के भीतर है।

​औद्योगिक मोर्चे पर महाराष्ट्र निवेश और निर्यात के मामले में देश का नेतृत्व कर रहा है। अक्टूबर 2019 से मार्च 2025 के बीच भारत में आए कुल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) का 31 प्रतिशत हिस्सा अकेले महाराष्ट्र ने हासिल किया है। साथ ही, देश के कुल निर्यात में राज्य की 15 प्रतिशत हिस्सेदारी है।

रोजगार के क्षेत्र में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) ने क्रांति ला दी है। दिसंबर 2025 तक पंजीकृत 63.85 लाख उद्यमों ने लगभग 2.52 करोड़ लोगों को रोजगार प्रदान किया है।

इसके अलावा, सॉफ्टवेयर निर्यात और स्टार्टअप इकोसिस्टम में भी महाराष्ट्र ने नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं, जहां देश के कुल स्टार्टअप्स में से 17 प्रतिशत अकेले इसी राज्य में हैं। यह सर्वेक्षण 6 मार्च को पेश होने वाले आगामी बजट के लिए एक मजबूत आधार तैयार करता है।


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