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मुंबई लोकल: जीवनरेखा या ‘डेथ कॉरिडोर’? हर दिन 13 मौतें, फिर भी प्रशासन बेखबर

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  • बुलेट ट्रेन के ख्वाब में मशगूल हुक्मरान

  • मौत की पटरियों पर दौड़ती ट्रेनें

  • एक दशक में 29,000 मुंबईकर गंवा चुके हैं जान

  • भीड़, लापरवाही और सिस्टम की नाकामी का खौफनाक सच

✍️ डिजिटल न्यूज डेस्क, मुंबई | मुंबईकरों की धड़कन कही जाने वाली लोकल ट्रेन अब ‘मौत की गाड़ी’ बन चुकी है। वर्ष 2025 के आधिकारिक आंकड़े रूह कंपा देने वाले हैं। पिछले एक साल में 4,841 रेल हादसे हुए, जिनमें 2,587 यात्रियों की मौत हो गई और 2,254 लोग जीवन भर के लिए अपाहिज हो गए। वहीं, पिछले एक दशक में मुंबई की पटरियों पर 29,000 से अधिक यात्रियों ने अपनी जान गंवाई है।

मुंबई की लोकल ट्रेन, जिसे कभी शहर की जीवनरेखा कहा जाता था, अब हर दिन दर्जनों परिवारों के लिए मातम का सबब बन रही है। प्रशासन की सुस्ती और सरकार की चुप्पी ने इस जीवनवाहिनी को ‘मौत की पटरी’ में बदल दिया है।

एक तरफ अरबों रुपये बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट पर फूंके जा रहे हैं, और पीआर स्टंट पर भी बेतहाशा खर्च किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ छात्रों के लिए अलग कोच की मांग को रेल प्रशासन कचरे के डिब्बे में डाल देता है। सुरक्षा के नाम पर ‘कवच’ की बातें केवल हेडलाइन तक सीमित हैं, जबकि जमीनी हकीकत आज भी खून से सनी पटरियां हैं।

हादसे और सरकारी बेरुखी

10 फरवरी 2026 को डोंबिवली का छात्र सोहम कटरे अपनी 12वीं बोर्ड परीक्षा का पहला पेपर देने जा रहा था। मुंब्रा-कलवा के बीच जानलेवा भीड़ के धक्के से वह ट्रेन से बाहर गिर पड़ा और मौके पर ही उसकी मौत हो गई। इससे पहले 30 जनवरी को सायन स्टेशन के पास तीन यात्री पटरी पर गिरे, जिनमें अफजल चौधरी की हालत अब भी नाजुक बनी हुई है। बदलापुर में एक महिला ट्रेन पकड़ने के चक्कर में नीचे गिर पड़ी, हाथ कट गए।

विधानसभा में भी गूंजा मुद्दा

विधानसभा सत्र के दौरान असलम शेख, संजय केलकर और अन्य विधायकों ने इन घटनाओं पर गंभीर चिंता जताई है। छात्रों के लिए अलग डिब्बे, स्वचालित दरवाजे और ऑफिस टाइमिंग में बदलाव जैसी मांगें वर्षों से उठाई जा रही हैं, लेकिन रेलवे प्रशासन और सरकार की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। प्रशासन आज भी हादसों का ठीकरा ट्रैक क्रॉसिंग और यात्रियों की गलती पर फोड़कर पल्ला झाड़ लेता है।

खूनी आंकड़े: एक दशक के लोकल हादसे

वर्ष 2025 में ट्रैक क्रॉसिंग से 1,063 मौतें दर्ज की गईं। जून 2025 में दिवा-मुंब्रा सेक्शन में भीड़ के कारण 4-5 यात्रियों की जान गई। साल 2024 में ट्रेसपासिंग और पोल से टकराने जैसी घटनाओं में 2,282 मौतें हुईं। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भी लोकसभा में स्वीकार किया कि 2024 में मुंबई में 1,408 मौतें हुईं। पिछले एक दशक में 29,000 से अधिक लोग लोकल ट्रेन हादसों में अपनी जान गंवा चुके हैं, जो सिस्टम की विफलता की गवाही देता है।

 


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