ISRO चीफ बोले- हम डेटा का एनालिसिस कर रहे
✍️ डिजिटल न्यूज़ डेस्क, श्रीहरिकोटा | नए वर्ष यानि 2026 की शुरुआत में ही (ISRO) को बड़ा झटका लगा है। 12 जनवरी को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा में सतीश धवन स्पेस सेंटर (SDSC-SHAR) से सुबह 10:18 बजे IST पर प्रक्षेपित मिशन तीसरे चरण में आई गंभीर अनॉमली के कारण असफल हो गया।
शुरुआती दो चरण सामान्य रहने के बावजूद, तीसरे सॉलिड-फ्यूल चरण (PS3) में चैंबर प्रेशर गिरने और रोल-रेट में अस्थिरता से रॉकेट तय ट्रैजेक्टरी से भटक गया और आवश्यक वेग हासिल नहीं कर सका। परिणामस्वरूप, रणनीतिक हाइपरस्पेक्ट्रल अर्थ-ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट EOS-N1 (अन्वेषा) सहित कुल 16 सैटेलाइट्स कक्षा में स्थापित नहीं हो सके।
इसरो के चेयरमैन वी. नारायणन ने कहा कि PS3 फेज के आखिर में लॉन्च व्हीकल में ज्यादा गड़बड़ी देखी गई, जिसके बाद फ्लाइट पाथ में बदलाव का पता चला। उन्होंने आगे कहा कि इसरो डेटा का एनालिसिस कर रहा है और जल्द ही और डिटेल्स शेयर करेगा।
इस विफलता का असर केवल तकनीकी नहीं, बल्कि रणनीतिक और आर्थिक भी है। EOS-N1 को सीमा निगरानी, सर्विलांस और उन्नत इमेजिंग क्षमताओं के लिए विकसित किया गया था। इसके साथ-साथ भारतीय निजी कंपनियों, शैक्षणिक संस्थानों और विदेशी साझेदारों के सह-यात्री सैटेलाइट्स भी नष्ट हो गए।
The PSLV-C62 mission encountered an anomaly during end of the PS3 stage. A detailed analysis has been initiated.
— ISRO (@isro) January 12, 2026
ISRO अधिकारियों के अनुसार, लॉन्च के लगभग आठ मिनट बाद PS3 के अंत में वाहन में अस्थिरता बढ़ी, थ्रस्ट अपर्याप्त रहा और फ्लाइट-पाथ में डेविएशन दर्ज हुआ। प्रारंभिक टेलीमेट्री संकेत किसी मैन्युफैक्चरिंग या क्वालिटी-कंट्रोल चूक की ओर इशारा करते हैं, हालांकि अंतिम निष्कर्ष विस्तृत जांच के बाद ही सामने आएगा। फेलियर एनालिसिस कमिटी का गठन कर दिया गया है, जो सप्लाई-चेन और उत्पादन प्रक्रियाओं की गहन समीक्षा करेगी।
यह PSLV श्रृंखला की लगातार दूसरी असफलता मानी जा रही है। इससे पहले मई 2025 में भी एक मिशन में PS3 से जुड़ी समस्या सामने आई थी। मौजूदा C62 मिशन में अनुमानित आर्थिक नुकसान ₹900–1,000 करोड़ के बीच आंका जा रहा है, जिसमें सैटेलाइट विकास, रॉकेट निर्माण, अवसर लागत और जांच खर्च शामिल हैं।
सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं तीखी हैं और विदेशी ग्राहकों के भरोसे पर असर की आशंका जताई जा रही है। हालांकि ISRO का ट्रैक-रिकॉर्ड मजबूत रहा है और एजेंसी ने भरोसा दिलाया है कि सीख लेकर आगामी मिशनों में आवश्यक सुधार किए जाएंगे।
