संजय राउत के दावे के बाद राजनीतिक हलचल तेज
✍🏻 डिजिटल न्यूज़ डेस्क, मुंबई | महानगर पालिका (BMC) चुनाव के परिणामों के बाद मेयर पद को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति में सरगर्मी तेज हो गई है। शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत ने रविवार को एक बड़ा दावा करते हुए कहा कि एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के कई नवनिर्वाचित पार्षद मुंबई में भाजपा का मेयर नहीं चाहते। राउत के अनुसार, ये पार्षद मूल रूप से बाल ठाकरे द्वारा गठित अविभाजित शिवसेना का हिस्सा रहे हैं और उनकी निष्ठा अभी भी शिवसैनिक वाली ही है।
होटल पॉलिटिक्स में फंसे नए नगरसेवक:
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने अपने 29 नवनिर्वाचित पार्षदों को मुंबई के एक लग्जरी होटल में शिफ्ट कर दिया है। जहां पार्टी इसे बीएमसी कामकाज की ‘कार्यशाला’ बता रही है, वहीं विपक्ष इसे पार्षदों को टूटने से बचाने की कोशिश करार दे रहा है। राउत का कहना है कि शिंदे गुट के पार्षदों को बंधक बनाकर नहीं रखा जा सकता और संचार के माध्यमों से वे संपर्क में हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि खुद शिंदे भी शायद मुंबई में भाजपा का वर्चस्व नहीं चाहते।
शिंदे गुट का क्या है कहना:
शिवसेना नेता शीतल म्हात्रे ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि पार्षद पहली बार चुने गए हैं, इसलिए उन्हें प्रशिक्षित किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि महायुति एकजुट है और ‘होटल पॉलिटिक्स’ जैसी कोई बात नहीं है। हमने महायुति गठबंधन में भाजपा के साथ चुनाव लड़ा है।
विपक्ष की रणनीति:
उद्धव ठाकरे ने भी संकेत दिए हैं कि अगर परिस्थितियां बनीं, तो शिवसेना (UBT) का मेयर बन सकता है। चर्चा है कि उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे (मनसे) के बीच भी मेयर पद को लेकर बातचीत हुई है।
बीएमसी में सीटों का समीकरण :
कुल 227 सीटों में से भाजपा (89) और शिंदे शिवसेना (29) के गठबंधन के पास बहुमत है। हालांकि, शिवसेना (UBT) की 65 सीटें, कांग्रेस की 24, मनसे की छह और अन्य दलों की भूमिका इस मुकाबले को दिलचस्प बना रही है।
