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मुंबई का ‘महाबली’ पस्त: करोड़ों बहाए, मशीनरी लगाई, फिर भी बीएमसी में बहुमत को तरस गई बीजेपी!

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  • शहरों की सत्ता में बड़ा उलटफेर, भाजपा सबसे बड़ी ताकत; शिंदे गुट निर्णायक सहयोगी

  • बीजेपी का ‘ऑपरेशन कमल’ शहरी चक्रव्यूह में फंसा, बीएमसी में ‘सत्ता का वनवास’ जारी

✍🏻 डिजिटल न्यूज़ डेस्क, मुंबई | महाराष्ट्र के 29 नगर निगमों के नतीजों ने साफ कर दिया है कि सत्ता की सीढ़ी चढ़ना और जनता के दिल में उतरना, दो अलग बातें हैं। राज्य की 2,869 सीटों में से 1,425 सीटें झटककर बीजेपी ‘सबसे बड़े दल’ का तमगा तो गले में लटकाए घूम रही है, लेकिन यह जीत उस भव्य विजय रथ जैसी नहीं है जिसका सपना दिल्ली से मुंबई तक देखा गया था।

खासकर मुंबई मनपा (बीएमसी) में, जहां बीजेपी पिछले 9 सालों से अघोषित रूप से ‘कुंडली’ मारकर बैठी थी, वहां नतीजा ‘खोदा पहाड़, निकली चुहिया’ जैसा रहा। सरकारी मशीनरी का पहिया और धन-बल का दरिया बहाने के बावजूद, पार्टी की झोली में पिछली बार के मुकाबले महज 7 सीटों का इजाफा हुआ।

शहरी महाराष्ट्र ने संदेश दे दिया है कि वह किसी एक दल की जागीर नहीं है। ‘एकला चलो रे’ का नारा लगाने वाली बीजेपी अब शिंदे गुट और क्षेत्रीय दलों की बैसाखियों के बिना सत्ता की दहलीज पार नहीं कर सकती। चाणक्य नीति धरी की धरी रह गई और मुंबई की सत्ता पर ‘एकछत्र राज’ का सपना एक बार फिर गठबंधन की मजबूरियों में दफन हो गया।

हालांकि मुंबई की बृहन्मुंबई महानगर पालिका (बीएमसी) में भाजपा 89 सीटों के साथ सबसे बड़े दल के रूप में सामने आई है, लेकिन 227 सदस्यीय सदन में बहुमत से दूर रही। यहां उद्धव ठाकरे गुट को 65 सीटें, शिंदे गुट को 29, और कांग्रेस को 24 सीटें मिलीं। नतीजतन, देश की सबसे अमीर नगर निगम में सत्ता का समीकरण पोस्ट-पोल गठजोड़ पर टिक गया है।

मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) के अन्य नगर निगमों में तस्वीर और भी स्पष्ट रही। ठाणे में शिंदे गुट ने 75 सीटों के साथ दबदबा बनाया, जबकि कल्याण–डोंबिवली में भाजपा (50) और शिंदे गुट (53) के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली। नवी मुंबई में भाजपा ने 65 सीटें जीतकर बढ़त हासिल की।

पश्चिम महाराष्ट्र में भाजपा का शहरी आधार मजबूत दिखा। पुणे में पार्टी ने 119 सीटें जीतकर स्पष्ट बढ़त बनाई, वहीं पिंपरी–चिंचवड़ और सोलापुर में भी भाजपा सबसे आगे रही। इसके उलट कोल्हापुर में कांग्रेस ने 34 सीटों के साथ अपनी मौजूदगी दर्ज कराई, हालांकि यहां भी जनादेश पूरी तरह एकतरफा नहीं रहा।

उत्तर महाराष्ट्र और विदर्भ में मतदाताओं ने मिला-जुला फैसला दिया। नागपुर में भाजपा ने 102 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत पाया, जबकि नाशिक और अमरावती जैसे शहरों में कांग्रेस, भाजपा और क्षेत्रीय दलों के बीच त्रिकोणीय मुकाबला दिखा। मराठवाड़ा के कई नगर निगमों छत्रपति संभाजीनगर, नांदेड़ और लातूर में स्थानीय व क्षेत्रीय दलों ने सत्ता संतुलन की भूमिका निभाई।

कुल मिलाकर, ये नतीजे संकेत देते हैं कि महाराष्ट्र की शहरी राजनीति में भाजपा सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी है, लेकिन सत्ता की चाबी अब भी साझेदारों और स्थानीय समीकरणों के हाथ में है। आने वाले दिनों में नगर निगमों में महापौर और स्थायी समिति के चुनाव राजनीतिक जोड़–तोड़ की असली परीक्षा होंगे।

सीटों का गणित

कुल नगर निगम: 29
कुल वार्ड: 893
कुल सीटें: 2,869
कुल उम्मीदवार: 15,900

बीएमसी चुनाव में वोट

बीजेपी  1,179,273 वोट → 45.22%
शिवसेना (ठाकरे गुट) — 717,736 वोट → 27.52%
शिवसेना (शिंदे) — ~242,646 → 9.31%

 राज्यवार आंकड़े

बीजेपी महायुति वोट सीट-शेयर 49.7%
विपक्ष/अन्य का संयुक्त सीट-शेयर  50.3%

प्रमुख दलों का राज्यवार प्रदर्शन (ग्रैंड टोटल)

भाजपा: 1,425 सीटें – सबसे बड़ा दल
शिवसेना (शिंदे गुट): 399 सीटें
कांग्रेस: 324 सीटें
राकांपा (अजित पवार गुट): 167 सीटें
शिवसेना (ठाकरे गुट): 155 सीटें
गैर-मान्यता प्राप्त दल: 196 सीटें
अन्य राज्य स्तरीय/मान्यता प्राप्त दल: 129 सीटें
राकांपा (शरद पवार गुट): 36 सीटें
स्वतंत्र उम्मीदवार: 19 सीटें
मनसे:  13 सीटें

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