मुंबई। बंबई उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि केंद्र सरकार को देश भर में हवाई अड्डों के नामकरण के लिए एक समान नीति तैयार करनी चाहिए और और नए नागरिक उड्डयन मंत्री को इस कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए।
मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति जी. एस. कुलकर्णी की पीठ ने वरिष्ठ वकील फिल्जी फ्रेडरिक की ओर से दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार के वकील अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह से कहा ‘हम मसौदा नीति की वर्तमान स्थिति जानना चाहेंगे?’ पीठ ने कहा कि नए नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को इस संबंध में नीति तैयार करने को अपना ‘पहला काम’ मानना चाहिए।
पीठ ने कहा कि वह नवी मुंबई में पिछले महीने हुए घटना की अनुमति नहीं दे सकती है, जब लगभग 25,000 लोगों ने कोविड-19 प्रोटोकॉल को तोड़ते हुए एक रैली का आयोजन कर आगामी हवाई अड्डे का नाम एक स्थानीय नेता के नाम पर रखने की मांग की थी। वर्ष 016 में एक मसौदा नीति तैयार की गई थी, जिसमें शहरों के नाम पर हवाई अड्डों का नाम रखने का प्रस्ताव था, न कि व्यक्तियों के नाम पर। हालांकि, ऐसी नीति की वर्तमान स्थिति ज्ञात नहीं है।
पिछले महीने महाराष्ट्र सरकार और सिडको प्रशासन ने शिवसेना के संस्थापक दिवंगत बाल ठाकरे के नाम पर ग्रीनफील्ड हवाई अड्डे का नाम रखने की घोषणा की थी। इसके बाद नवी मुंबई में 24 जून को स्थानीय लोगों ने कुछ राजनेताओं के साथ दिवंगत सामाजिक कार्यकर्ता डी. बी. पाटिल के नाम पर नवी मुंबई में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का नाम रखने की मांग के लिए प्रदर्शन किया था।
