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मौद्रिक नीति प्रणाली में बदलाव से बॉन्ड मार्केट पर होगा असरः राजन

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समाचार प्रहरी, मुंबई। भारतीय अर्थव्यवस्था धीरे-धीरे महामारी के झटके से बाहर निकल रही है। ऐसे में भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने चेताया है कि देश के मौद्रिक नीति के ढांचे में किसी तरह के बड़े बदलावों से बांड बाजार प्रभावित हो सकता है। राजन ने रविवार को कहा कि मौजूदा व्यवस्था ने मुद्रास्फीति को काबू में रखने और वृद्धि को प्रोत्साहन देने में मदद की है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार का साल 2024-25 तक भारतीय अर्थव्यवस्था को 5,000 अरब डॉलर पर पहुंचाने का लक्ष्य आकांक्षी अधिक है। महामारी से पहले भी इस लक्ष्य को लेकर सावधानी से गणना नहीं की गई।

पूर्व गवर्नर ने कहा, ‘मेरा मानना है कि मौद्रिक नीति प्रणाली ने मुद्रास्फीति को नीचे लाने में मदद की है। इसमें रिजर्व बैंक के लिए अर्थव्यवस्था को समर्थन देने की गुंजाइश भी है। यह सोचना भी मुश्किल है कि यदि यह ढांचा नहीं होता, तो हम कैसे इतना ऊंचा राजकोषीय घाटा झेल पाते।’ रिजर्व बैंक को खुदरा मुद्रास्फीति को चार प्रतिशत (दो प्रतिशत ऊपर या नीचे) पर रखने का लक्ष्य दिया गया है। केंद्रीय बैंक के गवर्नर की अध्यक्षता वाली छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) इस लक्ष्य को ध्यान में रखकर नीतिगत दरें तय करती है। अगले पांच साल के लिए मुद्रास्फीति के लक्ष्य को इसी महीने अधिसूचित किए जाने की उम्मीद है।

सरकार कोरोना वायरस से प्रभावित अर्थव्यवस्था को उबारने के लिए उल्लेखनीय रूप से ऊंचा कर्ज लेने की योजना बना रही है। ऐसे में कुछ हलकों से कुल वित्तीय सेहत को लेकर चिंता जताई जा रही है। बॉन्ड पर प्रतिफल भी इस समय ऊपर की ओर जा रहा है। सुधार उपायों के बारे में राजन ने कहा कि साल 2021-22 के बजट में निजीकरण पर काफी जोर दिया गया है। उन्होंने कहा कि निजीकरण को लेकर सरकार का रिकार्ड काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। उन्होंने कहा कि इस बार यह कैसे अलग होगा। राजन ने कहा कि इस बार के बजट में काफी हद तक खर्च तथा प्राप्तियों को लेकर पारदर्शिता दिखती है। पहले के बजट में ऐसा नहीं दिखता था।


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