लखनऊ, १ सितंबर २०२४ । वाराणसी स्थित आईआईटी- बीएचयू में इंजीनियरिंग छात्रा से गैंगरेप के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। करीब सात महीने बाद बीएचयू गैंगरेप के तीन आरोपियों में से दो को जमानत मिल गई है। हाई कोर्ट ने आरोपी कुणाल पांडेय और आनंद अभिषेक चौहान को सशर्त जमानत दी है। गैंगरेप के तीनों आरोपी बीजेपी आईटी सेल से जुड़े थे।
आरोपियों की रिहाई को लेकर उत्तर प्रदेश की योगी सरकार पर हमला करते हुए सपा और कांग्रेस ने कहा कि इस घटना से पीएम मोदी और बीजेपी के कथित ‘महिला सुरक्षा’ के पाखंड का पर्दाफाश हो गया है।
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने ‘एक्स’ पर एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया है कि मामले की कमजोर पैरवी के कारण अदालत ने दो आरोपियों को जमानत दे दी। उन्होंने कहा, ‘जनता बीजेपी की राजनीति और अराजकता से तंग आ चुकी है। बीजेपी को देश से हाथ जोड़कर माफी मांगनी चाहिए और अपने शासन के दौरान हुई असुविधा के लिए खेद व्यक्त करना चाहिए।’
बता दें कि आईआईटी-बीएचयू परिसर में एक नवंबर 2023 की रात को एक छात्रा हॉस्टल से बाहर गई थी, तभी करमन बाबा मंदिर के पास मोटरसाइकिल सवार तीन लोगों ने उसे जबरन एक कोने में ले गए, कथित तौर पर उसके कपड़े उतार दिए तथा उसका वीडियो बनाया और तस्वीरें खींचीं।
शिकायत के आधार पर लंका थाने में आईपीसी की धारा 354 (महिला का शील भंग करने के इरादे से उस पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग) और सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम के सुसंगत प्रावधानों के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। बाद में सामूहिक बलात्कार का आरोप भी प्राथमिकी में जोड़ दिया गया। घटना के दो महीने बाद पिछले साल दिसंबर में मामले में तीन आरोपियों-कुणाल पांडे, आनंद उर्फ अभिषेक चौहान और सक्षम पटेल को गिरफ्तार किया गया था।
