प्रहरी संवाददाता, मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने महंगाई का दबाव बढ़ने की बात स्वीकार करते हुए बुधवार को उम्मीद जताई कि दक्षिण-पश्चिमी मानसून के सामान्य रहने से मुद्रास्फीति का दबाव कम होगा। खाद्य वस्तुओं और उत्पादन के साधनों में मु्द्रास्फीति का दबाव बढ़ा है। उन्होंने यह माना कि खाद्य वस्तुओं एवं ईंधन की कीमतें बढ़ने से फरवरी के पांच प्रतिशत की तुलना में मार्च 2021 में खुदरा महंगाई 5.5 प्रतिशत हो गई और मुख्य मुद्रास्फीति (विनिर्मित वस्तुओं के मूल्य पर आधारित महंगाई दर) ऊंची बनी रही।
कोविड-19 महामारी के बढ़ते प्रकोप के बीच बुधवार को आनन फानन में केंद्रीय बैंक की ओर से एक घोषणा की गई। आरबीआई के गवर्नर ने कहा कि अर्थव्यवस्था के आगे के हालात को लेकर अनिश्चता है और गिरावट का जोखिम बढ़ा है। उन्होंने लोगों और छोटे उद्यमियों के लिए कर्ज चुकाने में राहत और बैंकों को कर्ज के लिए धन की उपलब्धता बढ़ाने के उपायों के अलावा स्वास्थ्य सेवा एवं उत्पाद विनिर्माण क्षेत्र के लिए 50,000 करोड़ रुपए के वित्तपोषण की योजना की घोषणा की।
दास ने कहा कि उद्यम और घर-परिवार लॉकडाउन के “अनुरूप ढलने की कोशिश कर रहे” हैं और पिछले साल के राष्ट्रीय लॉकडाउन मुकाबले इस बार लागू प्रतिबंधों का मांग पर असल अपेक्षाकृत “हल्का” रहेगा। उन्होंने कहा कि होटल और खुदरा ब्याज जैसे कुछ संवेदनशील क्षेत्रों में समग्र मांग में कुछ समय के लिए कमी हो सकती है। हालांकि लॉकडाउन जैसी पाबंदियां लगाये जाने के बीच कुछ विश्लेषकों ने वित्तीय वर्ष 2021-22 में भारत की आर्थिक वृद्धि दर के अपने पहले के अनुमान घटा दिए हैं। वैश्विक रेटिंग एजेंसी एसएंडपी ने बुधवार को भारत की वृद्धि का अपना पूर्वानुमान 11 प्रतिशत से घटाकर 9.8 प्रतिशत कर दिया। रिजर्व बैंक का आकलन है कि अर्थव्यवस्था मौजूदा वित्तीय वर्ष में 10.5 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी।
