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दो साल में डिफॉल्टर्स की संख्या में काफी इजाफा

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जानबूझकर कर्ज लौटाने में चूक करने वालों की संख्या बढ़कर 2,494 हुई : सीतारमण

मुंबई। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मंगलवार को संसद को बताया कि 31 मार्च, 2021 तक जानबूझकर कर्ज लौटाने में चूक करने वाले खाताधारकों की संख्या बढ़कर 2,494 हो गई है। पहले डिफॉल्टर्स की संख्या 2,208 थी। उन्होंने कहा कि बकाया वसूली के लिए उधारकर्ताओं या गारंटरों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया शुरू करने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।


वित्त मंत्री ने राज्यसभा को एक लिखित उत्तर में कहा कि पिछले तीन वित्त वर्ष के दौरान, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) ने गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) और बट्टे खाते में डाले गए ऋणों में 3,12,987 करोड़ रुपये की वसूली की गई है।

उन्होंने कहा, ‘रिजर्व बैंक के अनुसार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) ने अपनी रिपार्ट में बताया है कि जानबूझकर कर्ज लौटाने में चूक करने वालों की संख्या 31 मार्च 2019 को 2,017 थी। यह 31 मार्च 2020 को बढ़कर 2,208 और 31 मार्च 2021 को 2,494 हो गई।’

रिजर्व बैंक ने कहा कि बैंकों द्वारा सेंट्रल रिपोजिटरी ऑफ इंफॉर्मेशन ऑन लार्ज क्रेडिट्स (सीआरआईएलसी) को रिपोर्ट किए गए आंकड़ों के अनुसार, 31 मार्च 2019, 31 मार्च 2020 और 31 मार्च 2021 तक क्रमशः 5,73,202 करोड़ रुपये, 4,92,632 करोड़ रुपये और 4,02,015 करोड़ रुपये का फंसे कर्ज (एनपीए) के रूप में वर्गीकृत किया गया है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने वर्ष 2020-21 के दौरान 1,31,894 करोड़ रुपये को बट्टे खाते में डाला है। वर्ष 2019-20 में 1,75,876 करोड़ रुपये बट्टेखाते में डाले गए थे।


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