मुंबई। घरेलू रेटिंग एजेंसी इंडिया रेटिंग्स ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि टैक्स, विशेष रूप से अप्रत्यक्ष करों की वजह से भारतीय परिवारों की स्थिति खराब हुई है। इसके साथ ही उत्पाद शुल्क में वृद्धि से पेट्रोल और डीजल के दाम ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गए, जिससे महंगाई चरम पर है और इससे परिवारों का बजट प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप दोनों तरीके से प्रभावित हो रहा है। परिवारों पर कर का कुल बोझ बढ़कर 75 प्रतिशत पर पहुंच गया है, जो वित्त वर्ष 2009-10 में 60 प्रतिशत था।
एजेंसी का कहना है कि कराधान का बोझ, विशेष रूप से सामानों पर लगने वाला अप्रत्यक्ष कर परिवारों को उपभोग पर अधिक खर्च करने से रोक रहा है। रेटिंग एजेंसी ने मंगलवार को कहा कि कॉरपोरेट के लिए आयकर दर को सुसंगत किया गया है, लेकिन परिवारों के लिए ऐसा कोई कदम नहीं उठाया गया है। परिवारों पर कर के बोझ से उपभोग या खपत में सुधार प्रभावित हो सकता है। महामारी से पहले ईधन पर उत्पाद शुल्क के जरिये अप्रत्यक्ष कर में वद्धि कर दी गई। कोरोना की दूसरी लहर से आम जनजीवन प्रभावित हुआ है।
