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जातिगत जनगणना पर अखिलेश को मिला मायावती का साथ

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यूपी की सियासत में हो सकता है बड़ा उलटफेर!

डिजिटल न्यूज डेस्क, लखनऊ। उत्तर प्रदेश की सियासत में जातिगत जनगणना का मुद्दा अब और गरमा गया है। बहुजन समाज पार्टी (BSP) की मुखिया मायावती ने समाजवादी पार्टी (SP) अध्यक्ष अखिलेश यादव की जातिगत जनगणना की मांग का खुलकर समर्थन किया है। कांशीराम की जयंती के मौके पर मायावती ने जातिगत जनगणना को बहुजन समाज के हक में बताया और केंद्र सरकार से इसे जल्द कराने की मांग की। उनका यह बयान राज्य की राजनीति में नए समीकरणों की ओर इशारा कर रहा है। मायावती के इस समर्थन से आगामी चुनावी राजनीति पर असर पड़ सकता है और भाजपा के लिए नई रणनीति बनाने की जरूरत खड़ी हो सकती है।

बसपा सुप्रीमो मायावती ने शनिवार को कांशीराम की जयंती पर कार्यकर्ताओं को संदेश देते हुए अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर संदेश पोस्ट किया है। उन्होंने बसपा को बहुजनों की सबसे हितैषी पार्टी बताया और कहा कि बसपा सरकार के कार्यकाल में ही इस समाज के लोगों का कल्याण हुआ है। उन्होंने पार्टी संस्थापक कांशीराम की बात को दोहराते हुए कहा कि बहुजनों को अपने वोट की ताकत को समझना होगा और अपने उद्धार के लिए स्वयं के हाथों सत्ता की चाबी लेनी होगी। यही कांशीराम के लिए बहुजनों की सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

 

इस मुद्दे पर अखिलेश के साथ आईं मायावती

बसपा सुप्रीमो ने इस दौरान अखिलेश यादव की जातिगत जनगणना का भी मांग का भी समर्थन किया और कहा कि बहुजन समाज की आबादी इस समय 80 फीसद से ज्यादा है। संवैधानिक और कानूनी तौर पर उनके हक के लिए जनगणना से जनकल्याण की गारंटी डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने राष्ट्रीय जनगणना से प्रावधान किया है। जनगणना नहीं कराने पर संसदीय समिति ने भी चिंता जताई है।

अखिलेश यादव पहले ही जातिगत जनगणना को लेकर मुखर रहे हैं। उन्होंने इसे सामाजिक न्याय और आरक्षण से जोड़ते हुए बार-बार मांग उठाई है कि अगर सरकार जनगणना नहीं कराती है, तो वह बहुजन समाज के हक को दबाने की साजिश कर रही है। लोकसभा चुनावों के दौरान भी यह मुद्दा छाया रहा था, जिसके चलते सपा को बड़ी सफलता मिली थी। अब मायावती के समर्थन से इस मांग को और मजबूती मिल गई है।

मायावती ने अपने बयान में कहा कि बहुजन समाज की आबादी 80% से अधिक है, लेकिन उनके संवैधानिक अधिकारों की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने कहा कि जातिगत जनगणना से सामाजिक न्याय की सही तस्वीर सामने आएगी और इससे नीतियां बनाने में मदद मिलेगी। मायावती के इस बयान के बाद सपा और बसपा के बीच नजदीकियां बढ़ने की अटकलें तेज हो गई हैं।

बसपा सुप्रीमो ने देश में तेजी से पनप रहे धर्म, क्षेत्र, जाति व संप्रदाय विवाद पर भी चिंता जताई और कहा कि इस तरह के घातक विवाद की असली जड़ में हर स्तर पर हावी हो रही संकीर्ण जातिवादी व सांप्रदायिक द्वेष की राजनीति है, जबकि महंगाई, गरीबी, बेरोजगारी, अशिक्षा और पिछड़ापन जैसे समस्याओं को पूरी तरह भुला दिया गया है।


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