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केंद्रीय मंत्री का विवादित बयान, कहा- यहीं बैठे हैं शिवाजी बनाने की फैक्ट्री के योग्य गुरु

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धर्मेंद्र प्रधान ने कहा- ‘समर्थ रामदास न होते तो शिवाजी महाराज भी नहीं होते’, बयान से महाराष्ट्र में सियासत होगी तेज

डिजिटल न्यूज डेस्क, मुंबई। केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने एक बार फिर विवादित बयान दिया है, जिसकी वजह से महाराष्ट्र में सियासत गरमाने के आसार हैं। दरअसल, प्रधान ने गुजरात में एक कार्यक्रम में यह कहा कि अगर समर्थ रामदास न होते तो शिवाजी, छत्रपति शिवाजी महाराज नहीं बन पाते। प्रधान ने यह भी कहा कि शिवाजी बनाने की फैक्ट्री के सभी योग्य गुरु यहीं बैठे हैं। अब इस घटना का वीडियो सामने आ गया है। इसके बाद से राज्य में सियासी माहौल गरमाने की आशंका है।

प्रधान के इस बयान के बाद संभाजी ब्रिगेड के प्रवक्ता डॉ. शिवानंद भानुसे ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यह विवाद जानबूझकर खड़ा किया जाता है। इससे पहले दिवंगत बाबासाहेब पुरंदरे ने भी यह मुद्दा उठाया था, बाद में उन्हें माफी मांगनी पड़ी थी।

 

बता दें कि शिवाजी महाराजा को लेकर बीजेपी के नेता हमेशा से बयान देते रहे हैं। राज्य के पूर्व गवर्नर भगतसिंह कोश्यारी ने कहा था कि यदि कोई आपसे पूछता है कि आपका आदर्श कौन है, तो आपको उसे खोजने के लिए बाहर जाने की ज़रूरत नहीं है। महाराष्ट्र में आज कई आदर्श हैं। छत्रपति शिवाजी महाराज अब पुराने समय के आदर्श बन गए हैं। नए युग में आपके नए आदर्श बाबासाहेब आंबेडकर से लेकर नितिन गडकरी तक हो सकते हैं।

 

भानुसे ने कहा कि जो लोग कहते हैं कि वे गुरु हैं, तो उनसे पहला प्रश्न यह है कि जब छत्रपति शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक हुआ था तो 18 देशों से प्रतिनिधि आए थे। उस समय रामदास जीवित थे। अगर वे गुरु थे तो फिर शिवाजी महाराज ने रामदास का जिक्र क्यों नहीं किया, उन्हें कैसे भूल गए?

दूसरा प्रश्न यह है कि यदि रामदास शिवराय (शिवाजी) का राज्याभिषेक करने के लिए वहां थे, तो बनारस से गागाभट्ट को क्यों बुलाया गया? तीसरा प्रश्न यदि रामदास गुरु थे तो जब ब्राह्मणों ने शिवाजी महाराज के राज्याभिषेक का विरोध किया, तो रामदास ने उन ब्राह्मणों का खुलकर विरोध क्यों नहीं किया? तब रामदास कहां थे? शिवाजी महाराज के राज्याभिषेक में उनका उल्लेख तक नहीं है।

रामदास और शिवराय की मुलाकात का कोई सबूत नहीं

भानुसे ने कहा कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि रामदास और शिवाजी महाराज की मुलाकात हुई थी। हालांकि, एक पत्र मिला है जिसमें मठ के लिए दान मांगने के लिए उनके आने का जिक्र है। इसलिए, भानुसे ने कहा कि इतिहास ने साबित कर दिया है कि रामदास, शिवाजी महाराज के गुरु नहीं थे।

 


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