प्रहरी संवाददाता, मुंबई। एयर इंडिया की आखिरकार अपने मूल मालिक के घर वापसी हो ही गई। एयर इंडिया की बिक्री के लिए मंगाई गई निविदा में टाटा सन्स ने सबसे अधिक बोली लगाई थी। शुक्रवार को सरकार ने एयर इंडिया के नए मालिक के बारे में आधिकारिक घोषणा की। टाटा सन्स की इकाई Talace Pvt Ltd ने 18000 करोड़ रुपये की बोली लगाई। यह सौदा इस साल दिसंबर के अंत तक पूरा हो जाने की उम्मीद है।
एयर इंडिया की घर वापसी पर रतन टाटा ने ‘वेलकम बैक, एयर इंडिया’ का ट्वीट किया है। ट्वीट में रतन टाटा का एक नोट भी अटैच है। इस नोट में लिखा गया है, ‘टाटा ग्रुप का एयर इंडिया के लिए बोली जीतना बेहद अच्छी खबर है। इस बात में कोई दो राय नहीं है कि एयर इंडिया को फिर से खड़ा करने के लिए मेहनत लगेगी। उम्मीद है कि यह फैसला एविएशन इंडस्ट्री में टाटा ग्रुप की मौजूदगी के लिए एक बड़ा बाजार अवसर उपलब्ध कराएगा। एयर इंडिया ने जेआरडी टाटा के नेतृत्व में ‘दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित एयरलाइंस में से एक’ के तौर पर ख्याति बटोरी थी।’
टाटा एयरलाइंस से एयर इंडिया का सफर
अप्रैल 1932 में उद्योगपति जेआरडी टाटा ने टाटा एयर लाइंस का गठन किया। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जब विमान सेवाओं को बहाल किया गया, तब 29 जुलाई 1946 को टाटा एयरलाइंस ‘पब्लिक लिमिटेड’ कंपनी बन गई और उसका नाम बदलकर ‘एयर इंडिया लिमिटेड’ रखा गया। आज़ादी के बाद वर्ष 1947 में भारत सरकार ने एयर इंडिया में 49 प्रतिशत की भागेदारी ले ली थी।
प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की तत्कालीन सरकार ने जब 1953 में एयर इंडिया का राष्ट्रीयकरण किया, तो जेआरडी ने इसके खिलाफ जोरदार लड़ाई लड़ी। सरकार ने 11 एयरलाइनों का राष्ट्रीयकरण करने का फैसला किया था। इनमें से एयर इंडिया को छोड़कर सभी को भारी नुकसान हो रहा था। बाद में सभी को एक ही सरकारी निगम में विलय कर दिया गया था।
