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सेंसेक्स 2,500 अंक नीचे बंद हुआ
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युद्ध और कच्चे तेल की कीमतों ने बिगाड़ा खेल
✍️ डिजिटल न्यूज डेस्क, मुंबई | भारतीय वित्तीय बाजार के लिए गुरुवार का दिन किसी बुरे सपने से कम नहीं रहा। पश्चिम एशिया में गहराते युद्ध के बादलों और कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग ने दलाल स्ट्रीट पर ऐसा कोहराम मचाया कि निवेशकों की उम्मीदें ताश के पत्तों की तरह ढह गईं।
गुरुवार को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स करीब 2,500 अंक टूटकर जून 2024 के बाद की अपनी सबसे बड़ी गिरावट का गवाह बना। इस सुनामी में निवेशकों के 12.87 लाख करोड़ रुपये महज कुछ घंटों में ही हवा हो गए।
बाजार की इस बर्बादी के पीछे मुख्य वजह पश्चिम एशिया के तेल एवं गैस संयंत्रों पर होते हमले हैं। इन हमलों ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को हिलाकर रख दिया है, जिससे कच्चे तेल की कीमतों पर भारी दबाव बना।
तीन दिनों की मामूली बढ़त के बाद बाजार इस कदर फिसला कि सेंसेक्स 3.26 प्रतिशत के गोते के साथ 74,207.24 अंक पर बंद हुआ। 28 फरवरी से शुरू हुए इस संकट ने अब तक निवेशकों को 37 लाख करोड़ रुपये से अधिक की चोट पहुंचाई है, जिससे बाजार में डर का माहौल व्याप्त है।
सर्राफा बाजार में भी भारी बिकवाली
गिरावट का यह सिलसिला सिर्फ शेयर बाजार तक सीमित नहीं रहा; सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोना और चांदी की चमक भी फीकी पड़ गई। वैश्विक बाजारों में आई भारी बिकवाली के चलते दिल्ली के सर्राफा बाजार में चांदी 17,800 रुपये की भारी गिरावट के साथ 2.38 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई। वहीं, सोने की कीमतों ने भी 7,000 रुपये का गोता लगाया और यह 1.53 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बंद हुआ।
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व और बैंक ऑफ जापान के सख्त रुख के साथ-साथ बढ़ती महंगाई ने निवेशकों को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया है। विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि जब तक भू-राजनीतिक तनाव कम नहीं होता और ब्याज दरों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होती, बाजार में इसी तरह की अस्थिरता और गिरावट का दौर जारी रह सकता है। फिलहाल, निवेशकों की निगाहें अब बैंक ऑफ इंग्लैंड और यूरोपीय केंद्रीय बैंक के आगामी फैसलों पर टिकी हैं।
