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आर्थिक गतिविधियों पर दिखने लगा है लॉकडाउन का असर

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मुंबई। देश में लगातार दूसरे दिन कोविड-19 संक्रमण के 2.5 लाख से अधिक मामले आए हैं। इस चिंताजनक स्थिति के बीच एक रिपोर्ट में आगाह किया गया है कि लोगों की आवाजाही और कुछ कारोबार क्षेत्रों पर सीमित अंकुशों के बावजूद आर्थिक परिदृश्य निराशाजनक दिख रहा है। बिजली की खपत और ई-वे जीएसटी बिल संग्रहण भी पहले की तुलना में धीमा हो गया है। इसके अलावा, टीकाकरण भी घट गया है। रिपोर्ट में वैक्सीनेशन की रफ्तार को तेज करने पर जोर दिया गया है।
क्रिसिल ने मंगलवार को एक रिपोर्ट जारी की है, जिसमें कहा गया है कि संक्रमण के मामले काफी तेजी से बढ़ रहे हैं और अब अधिक से अधिक राज्य स्थानीय स्तर पर लोगों की आवाजाही और कारोबार पर अंकुश लगा रहे हैं। बिजली की खपत से लेकर जीएसटी ई-वे बिल संग्रहण में इसका असर दिख रहा है। क्रिसिल ने कहा कि राहत की बात यह है कि विनिर्माण और निर्माण गतिविधियों का परिचालन हो रहा है। ज्यादातर राज्यों में सामाजिक दूरी उपायों के साथ यात्रा और घूमने-फिरने से जुड़ी सेवाओं की अनुमति है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि चिंता की बात यह है कि टीकाकरण की सुस्त रफ्तार है। 18 अप्रैल को समाप्त सप्ताह में प्रतिदिन प्रत्येक 10 लाख लोगों पर 2,408 को टीका लगाया गया। इससे पिछले यानी 11 अप्रैल को समाप्त सप्ताह में यह आंकड़ा 2,554 का था। 18 अप्रैल तक 45 से 65 आयु वर्ग में सिर्फ 16.4 प्रतिशत आबादी को टीका लगा है। वहीं, 65 साल और उससे अधिक के आयुवर्ग में 33.1 प्रतिशत लोगों को टीका लगाया गया है। भारत संक्रमण के नए मामलों में ब्राजील को पीछे छोड़कर सबसे आगे निकल गया है।


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