✍🏻 प्रहरी बिजनेस डेस्क, मुंबई। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक तनावों के बीच 2020 से 2025 तक गोल्ड निवेश में तेजी देखी गई। 2025 की पहली तिमाही में अंतरराष्ट्रीय बाजार में गोल्ड की कीमतें $2,700 प्रति औंस के पार पहुंच गई हैं, जो अब तक का रिकॉर्ड स्तर है। निवेशकों के बीच गोल्ड को ‘सेफ हेवन’ मानकर भारी खरीदारी की जा रही है। वहीं, केंद्रीय बैंकों और कॉरपोरेट सेक्टर की आक्रामक खरीदारी ने इस तेजी को और भी बल दिया है।
केंद्रीय बैंक बने सोने के सबसे बड़े खरीदार
विश्व स्वर्ण परिषद (World Gold Council) के अनुसार, 2024 में वैश्विक केंद्रीय बैंकों ने रिकॉर्ड 1,000 टन से अधिक गोल्ड खरीदा। इसमें भारत के रिजर्व बैंक (RBI) की हिस्सेदारी 72.6 टन रही, जो 2021 के बाद की सबसे बड़ी सालाना खरीद है। अब RBI का कुल गोल्ड रिजर्व 876.18 टन तक पहुंच गया है।
वहीं, पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना ने 2020 से 2024 के बीच 300 टन से अधिक गोल्ड जोड़ा, जिससे उसका कुल स्टॉक 2,264 टन हो गया। दिलचस्प बात यह है कि 2024 में चीन हर महीने औसतन 15-20 टन गोल्ड खरीदता रहा।
प्राइवेट सेक्टर और ज्वैलरी उद्योग की बढ़ती मांग
भारत और चीन जैसे देशों में पारंपरिक मांग भी कीमतों को बढ़ावा दे रही है। भारत में 2024 के दौरान गोल्ड निवेश 239 टन तक पहुंच गया, जो 2023 की तुलना में 29% की वृद्धि है। वैल्यू टर्म में यह निवेश 1.5 लाख करोड़ रुपये को पार कर गया। भारत में ज्वैलरी कंपनियों—Tanishq और Malabar Gold—ने अकेले 2024 में 100 टन से अधिक गोल्ड खरीदा।
इसी तरह चीन की Chow Tai Fook जैसी ज्वैलरी कंपनियों ने भी साल भर में 200 टन से ज्यादा सोना खरीदा, जिससे देश की कुल ज्वैलरी मांग वैश्विक मांग का 25% हो गई।
कॉरपोरेट और खनन कंपनियों की रणनीति का असर
खनन कंपनियों जैसे Barrick Gold और Newmont Corporation ने भी उत्पादन और सप्लाई पर बड़ा असर डाला है। 2024 में Barrick ने 4 मिलियन औंस और Newmont ने 6 मिलियन औंस गोल्ड उत्पादन किया। विशेषज्ञों के अनुसार, उत्पादन लागत में बढ़ोतरी और सीमित सप्लाई भी कीमतों को ऊपर ले जा रही है।
हेज फंड्स और ETF का योगदान
BlackRock और Bridgewater जैसे ग्लोबल हेज फंड्स ने गोल्ड ETF के जरिए भारी निवेश किया है। 2024 में वैश्विक ETF होल्डिंग्स 3,000 टन के करीब थीं। भारत में भी गोल्ड ETF और गोल्ड लोन में बूम देखा गया—1.54 लाख करोड़ रुपये का गोल्ड लोन 2024 में दर्ज हुआ, जो 2023 की तुलना में 56% अधिक है। भारत में गोल्ड लोन मार्केट 2020 में 50,000 करोड़ रुपये था।
देशवार निवेश की होड़
गोल्ड रिजर्व के मामले में अमेरिका अब भी शीर्ष पर है—8,133.46 टन के साथ। हालांकि उसने हाल के वर्षों में नई खरीदारी नहीं की है। तुर्की ने भी आक्रामक रणनीति अपनाते हुए 2020 में 410 टन से बढ़ाकर 2024 में 584.93 टन तक गोल्ड स्टॉक कर लिया।
रूस ने भी भू-राजनीतिक अस्थिरता और प्रतिबंधों के मद्देनज़र गोल्ड को प्राथमिकता दी, और उसका रिजर्व 2,335.85 टन तक पहुंच गया है।
ग्लोबल ट्रेंड्स और आगे की राह
2020 में जहां गोल्ड की कीमतें $1,800/औंस थीं, वहीं 2024 के अंत तक ये $2,500 और अब 2025 में $2,700/औंस तक पहुंच गई हैं—यानी कुल 40% से अधिक की वृद्धि। वैश्विक मांग भी 2020 के 3,760 टन से बढ़कर 2024 में 4,800 टन हो चुकी है।
विश्लेषकों के अनुसार, यदि यही ट्रेंड जारी रहा, तो 2025 के अंत तक गोल्ड की कीमतें $2,900-3,000/औंस तक जा सकती हैं। बढ़ती महंगाई, डॉलर की कमजोरी, और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के चलते गोल्ड निवेशकों की पहली पसंद बना हुआ है।
