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घर चलाने के लिए भारतीय परिवारों ने अब तक 5,300 टन सोना गिरवी रखा

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गोल्ड लोन में रिकॉर्ड वृद्धि, डिफॉल्ट के मामले भी बढ़े

✍🏻 प्रहरी संवाददाता, लखनऊ। नई दिल्ली। देश में आर्थिक अस्थिरता और महंगाई के बीच गोल्ड लोन का चलन तेजी से बढ़ रहा है। 2014 से 2025 के बीच भारत में सोना गिरवी रखकर कर्ज लेने वालों की संख्या में दोगुनी से अधिक बढ़ोतरी हुई है। चालू वित्त वर्ष के पहले सात महीनों में गोल्ड लोन में 50% से अधिक बढ़ोतरी देखी गई है, जबकि अन्य व्यक्तिगत ऋण क्षेत्रों में यह वृद्धि 10% से कम रही है।

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के आंकड़ों के अनुसार, 31 मार्च 2024 तक, भारतीय परिवारों ने बैंकों से कुल 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक का ऋण लेने के लिए अपना सोना गिरवी रखा है। इसमें असंगठित क्षेत्रों और साहूकारों से लिए गए गोल्ड लोन शामिल नहीं हैं। एक अन्य रिपोर्ट में अनुमान है कि लगभग 5300 टन सोना गिरवी रखा गया है। हालांकि, इस दौरान डिफॉल्ट के मामलों में भी अप्रत्याशित इजाफा हुआ है, जिससे बैंकिंग और वित्तीय संस्थानों की चिंता बढ़ गई है।

 


₹10 लाख करोड़ के पार गोल्ड लोन बाजार

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और विभिन्न रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत में गोल्ड लोन बाजार 2025 तक ₹10 लाख करोड़ के पार पहुंच सकता है। सालाना 8.45% की वृद्धि दर के साथ, गोल्ड लोन अब पर्सनल लोन का बड़ा विकल्प बन चुका है।

गोल्ड लोन डिफॉल्ट 30% बढ़ा, बैंकों पर दबाव

RBI के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 2024 की अप्रैल-जून तिमाही में बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) का गोल्ड लोन नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPA) ₹6,696 करोड़ तक पहुंच गया, जो मार्च 2024 में ₹5,149 करोड़ था। सिर्फ बैंकों में गोल्ड लोन डिफॉल्ट 62% बढ़ा है, जबकि NBFCs के मामले में यह बढ़ोतरी 24% दर्ज की गई।
हालांकि जनवरी 2025 में कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने दावा किया कि करीब 3 लाख करोड़ रुपये के गोल्ड लोन बकाया हैं।  

नॉन-परफॉर्मिंग असेट्स (NPA) का अनुपात

गोल्ड लोन के NPA में 2024 तक 30-35% की वृद्धि देखी गई थी, लेकिन यह कुल NPA राशि का प्रतिशत नहीं दर्शाता। संगठित क्षेत्र में गोल्ड लोन का NPA अनुपात आमतौर पर 2-5% के बीच रहता है।
उदाहरण के लिए, IIFL फाइनेंस जैसे बड़े NBFC में 1.9 मिलियन (19 लाख) ग्राहकों में से डिफॉल्ट रेट 4.3% (82,000 मामला) दर्ज किया गया था। आरबीआई की ऑडिट रिपोर्ट में कहा गया है कि IIFL फाइनेंस ने 55,000 मामलों में गोल्ड की नीलामी में अनियमितताएं दिखाई है। अगर इसे पूरे संगठित क्षेत्र पर लागू करें, तो 2.1 लाख करोड़ के बाजार में 2-5% NPA का मतलब 4,200 करोड़ से 10,500 करोड़ रुपये के बीच डिफॉल्ट हो सकता है।

53 लाख किलो सोना गिरवी रखा गया

भारतीय परिवारों ने अब तक 5,300 टन (53 लाख किलो) सोना बैंकों और NBFCs में गिरवी रखा है। RBI की रिपोर्ट के अनुसार, मुथूट फाइनेंस जैसी प्रमुख गोल्ड लोन कंपनियों का पोर्टफोलियो 92,963.6 करोड़ रुपए तक पहुंच चुका है।

नकली सोना गिरवी रखने के मामले बढ़े

गोल्ड लोन की बढ़ती मांग के साथ धोखाधड़ी के मामले भी सामने आए हैं। कई लोगों ने नकली सोना गिरवी रखकर बैंकों और NBFCs से लोन लिया और समय पर चुकाने में असमर्थ रहे। इस कारण कई वित्तीय संस्थानों को भारी नुकसान हुआ है।

आर्थिक चुनौतियाँ और लोगों की जरूरतें बनीं वजह

विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती महंगाई, रोजगार की अनिश्चितता और उच्च ब्याज दरों के कारण लोग अपनी वित्तीय जरूरतों के लिए गोल्ड लोन ले रहे हैं। चिकित्सा खर्च, शिक्षा और शादी जैसे बड़े खर्चों के लिए भी लोग इस लोन का सहारा ले रहे हैं।

सरकार की सख्ती, बैंकों को कड़े निर्देश

RBI और सरकार ने गोल्ड लोन सेक्टर में अनियमितताओं को रोकने के लिए बैंकों को सख्त दिशा-निर्देश दिए हैं। अब सोने की शुद्धता की दोहरी जांच और लोन प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए नए नियम लाए जा रहे हैं।


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