स्वदेशी रक्षा क्षमताओं के लिए भारत की बड़ी उपलब्धि
डिजिटल न्यूज डेस्क, मुंबई। भारतीय सेना के लिए सोमवार का दिन एक ऐतिहासिक घटना के तौर पर दर्ज हुआ है। भारतीय थल सेना, नौसेना और वायु सेना के उप प्रमुखों ने स्वदेश में निर्मित हल्के लड़ाकू विमान (एलसीए) तेजस में उड़ान भरकर इतिहास रच दिया।
उप वायु सेना प्रमुख (वीसीएएस) एयर मार्शल ए.पी. सिंह ने प्रमुख लड़ाकू विमान उड़ाया। उप थल सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल एन.एस. राजा सुब्रमणि के साथ-साथ उप नौसेना प्रमुख वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने दो सीट वाले तेजस में उड़ान भरी।
इस अभ्यास सत्र के दौरान थल सेना, नौसेना और वायु सेना की क्षमता का पता चला कि तीनों सेनाएं किस तरह आधुनिक चुनौतियों का सामना करने के लिए एक साथ काम कर रही हैं। यह संयुक्त उड़ान इसलिए भी अभूतपूर्व है, क्योंकि पहली बार तीनों सेनाओं के उप प्रमुखों ने एक ही अवसर पर उड़ान भरी है, जो भारत की बढ़ती एकीकृत रक्षा क्षमताओं, आत्मनिर्भरता के प्रति प्रतिबद्धता का एक मजबूत प्रमाण है।

यह उड़ान जोधपुर के आसमान पर हुई, जहां भारतीय वायु सेना ने तरंग शक्ति 2024 अभ्यास सत्र का आयोजन किया है। यह भारत का पहला बहुराष्ट्रीय अभ्यास है, जिसका उद्देश्य इसमें भाग लेने वाले मित्र देशों (एफएफसी) के बीच अंतर-संचालन और परिचालन समन्वय को बढ़ाना है।
इस मिशन में तेजस को शामिल किए जाने से भारत के रक्षा बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण में स्वदेशी प्लैटफार्मों की महत्वपूर्ण भूमिका का पता चलता है।
भारत के स्वदेशी रक्षा विनिर्माण कौशल के प्रतीक तेजस की उड़ान देश की 'मेक इन इंडिया' पहल के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण है। एयरोनॉटिकल डिजाइन एजेंसी (एडीए) द्वारा डिजाइन किया गया, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) द्वारा विकसित और निर्मित तेजस एक अत्याधुनिक कई भूमिकाओं वाला लड़ाकू विमान है, जिसे विदेशी आयात पर निर्भरता को कम करते हुए भारत के सशस्त्र बलों की जरूरतों को पूरा करने के उद्देश्य से डिजाइन किया गया है।
